आखर साहित्य ने बताया गौरैया का महत्व ।

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विश्व गौरैया संरक्षण दिवस के अवसर पर सोमवार को आखर साहित्य चकिया के संयोजन मे आखर के अध्यक्ष कृष्णानन्द द्विवेदी ‘गुलाब’ जी के अध्यक्षता मे एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया गया।जिसमे अध्यक्ष जी ने अपने सम्बोंधन मे कहा कि श्रृष्टि मे जितने भी प्रकार के जड़ चेतन विद्यमान है वे सभी एक दूसरे के पूरक है।पर्यावरण को संतुलित बनाये रखने के लिए सभी की अपनी अनिवार्यता है,जिसमे गौरैया का भी एक महत्व पूर्ण स्थान है, संक्रमण फैलाने वाले कीड़े मकोड़े से पर्यावरण को बचाची है,किन्तु निरंतर उनका विलुप्त होना चिन्ता का विषय है, किन्तु इस बात की खुशी है कि आज पुन: हमारे अन्दर उनके संरक्षण की चेतना जागृत हुई है, जो एक शुभ संकेत है|

इसी क्रम मे साहित्यकार स्वतंत्र कुमार श्रीवास्तव ‘नवल’ ने लोक साहित्य में प्राचीन काल से गौरैयों के समावेश हुए कहा कि लोक साहित्य में गौरैया को घर की बेटी का स्थान प्रदान किया गया है,तथा उनकी उपस्थिती व अनुस्थिती मे शुभ-अशुभ जैसे भाव व्यक्त किये गये है, विभिन्न उत्सवों मे गाये जाने वाले पारम्परिक गीतों मे अनेकानेक प्रकार के वर्णन देखने को मिलते है|

एक गीत विशेष की व्याख्या करते हुए उन्होने कहा कि लडकी अपनी विदाई के समय अपने पिता से निवेदन करते हुए कहती है कि(बाबा निबियां क पेड़ जनी काटा,निबिया चिरईयां बसेरा,बलईयां लेही बिरन कै)अर्थात मै तो ससुराल जा रही हूं किन्तु हमारी अनुपस्थिती में गौरैया ही मेरी भाई की शुभ कामना करेगी,क्रमश:गीतकार मनोज द्विवेदी ‘मधुर’ने अपने व्यक्तिगत अनुभव को व्यक्त करते हुए कहा कि आज विभिन्न कारणो से गौरैयों का दिखना दुर्लभ हो गया है जिस कारण प्रकृति का सौन्दर्य ही छिन सा गया है अन्यथा सांयकाल झुण्ड़ का झुण्ड़ चिडियों का अपने घोसले की ओर चचहाते हुए जाना तथा प्रात:एवम सांय पेड़ो की झुरमुट मे चहचहाना वातावरण मे संजीवता घोल दिया करती थी जो अब नही के बराबर है,अगले क्रम मे संतोष कुमार यादव ने स्वरचित गीत – वह गौरैया ही थी जो मुझे देख चहचहाई थी के माध्यम से गौरैया के साथ मानवीय संवेदनाओ को व्यक्त किया।

इस दौरान बद्री प्रसाद मिश्र अवध बिहारी मिश्र, सर्वेश्वरी कुमार द्विवेदी आदि साहित्यकार एंव गणमान्य लोग मौजूद रहे।कार्यक्रम का संचालन संतोष कुमार यादव ने किया।
वही दुसरी तरफ विश्व गौरैया दिवस पर प्रा०वि०चकिया मे वन विभाग व विद्यालय परिवार तथा बुध्दजीवियो ने एक गोष्ठी आयोजित कर विलुप्त होती गौरैयो को कैसे बचाया जाये तथा गौरैयों की उपयोगिता पर प्रकाश डाला ।इस दौरान रेंजर तारा शंकर यादव,रेंजर नन्दलाल मौर्य, स्वतंत्र श्रीवास्तव एड०,अखिलेश चौबे,राजेश,चन्द्रभान,अमित, आशुतोष मिश्र सहित विद्यालय के सैकडो बच्चे मौजूद रहे।

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