कला से कलाबाज़ी ठीक नहीं !

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जयपुर (राजस्थान), सरकार की तरफ से स्थानीय कला और कलाकारों की हो रही उपेक्षा और उदासीनता को लेकर प्रदेशभर के करीब 200 कलाकारों ने जयपुर के जवाहर कला केंद्र के सामने बुधवार की शाम 5 से 7  बजे तक रचनात्मक प्रदर्शन किया . सभी विधाओं के कलाकारों ने कविता ,पेंटिंग, मूर्ति कला, जनगीत और नुक्कड़ नाटक के ज़रिये अपना विरोध प्रकट किया. कलाकारों का आरोप है कि जवाहर कला केंद्र की स्थापना के समय जो केंद्र का संविधान बनाया गया था, वर्तमान सरकार ने उससे छेड-छाड़ की है अतः उसे मूल रूप में लागू किया जाये . जवाहर कला केंद्र के कार्यक्रमों में लगातार स्थानीय कलाकारों की उपेक्षा की जा रही है जब कि इस केंद्र की स्थापना मूल रूप से राजस्थान की कला एवं संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए की गयी थी . इस संस्थान में सांस्कृतिक गतिविधियां कम और मेलों का आयोजन ज़्यादा होने लगा है . कलाकारों का यह भी आरोप है कि एक कला दीर्धा में पेंटिंग्स की जगह कपड़ों की दूकान खोल दी गयी है.

रवींद्र मंच प्रशासन की मनमानी को लेकर भी कलाकारों ने विरोध प्रकट किया . प्रशासन ने घास और पोर्च में बैठने से रोकने जैसे आदेश कई बार निकाले हैं . अब तो हालात यह है कि कलाकार शाम 6  बजे बाद रिहर्सल नहीं कर सकते और नाटक के प्रदर्शन वाले दिन सभागार 3 बजे बाद ही खोला जाता है . रंगकर्मी ज़फर खान का कहना है कि ” एक समय था जब नाटक के मंचन से एक दिन पहले  नाटक की तैयारी जैसे सेट आदि लगाने के लिए प्रेक्षागृह उपलब्ध कराया जाता था . वर्तमान मैनेजर ने नियमों का हवाला देकर 3  बजे का आदेश निकाल दिया है . अब आप ही बताइये 3 घंटे में नाटक की सारी तैयारियां कैसे की जा सकती है .”

रवींद्र मंच का मुख्य सभागार मरम्मत के कार्यों के लिए करीब दो साल से बंद पड़ा है . पिछले एक महीने से काम पूरा हो जाने के बावजूद रवींद्र मंच प्रशासन ने बुकिंग देना शुरू नहीं किया है . इप्टा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रणवीर सिंह का कहना है कि ” मुझे संदेह है कि रवींद्र मंच को प्राइवेट हाथों में ना दे दिया जाये . सरकार को इस मुद्दे पर अपनी स्थिती स्पष्ट करनी चाहिए ”

चित्रकार अमित कल्ला ने अपने साथियों के साथ मांग की है कि ” केंद्र और रवींद्र मंच की गवर्निंग काउन्सिल  में प्रदेश के सभी विधाओं के ऐसे कलाकारों का मनोनयन किया जाये जो परफार्मिंग आर्ट में बरसों से सक्रिय हो . दोनों केंद्रों के सालाना कार्यक्रमों कि रूपरेखा स्थानीय कलाकारों की राय से बनाई जाये. केंद्र के महानिदेशक पद पर मूल संविधान में किये गए प्रावधान के अनुरूप किसी वरिष्ठ कलाकार को लगाया जाये .

पद्मश्री सम्मानित कलाकारों ने भी जताया विरोध :

कलाकारों के इस विरोध प्रदर्शन में पद्मश्री से सम्मानित तीन कलाकार अर्जुन प्रजापति , पद्मश्री शाकिर अली और पद्मश्री तिलक गीताई शामिल हुए . साथ ही प्रदेश के कई वरिष्ठ कलाकार जैसे रणवीर सिंह , साबिर खान, माधव सिंह , सुरेश गोस्वामी , वरिष्ठ चित्रकार गोपाल स्वामी खेतांची , आर.बी. गौतम, ताज के अध्यक्ष हिमांशु झांकल , अमित कल्ला, दिलीप भट्ट, चंद्रदीप हाडा , के.के. कोहली  और मोनिका हाड़ा भी शामिल हुए .

Web Title: Artists have performed constructively at jkk jaipur against negligence and apathy of local art and artists(Art Update from Filmsthan , India)

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