‘एक दिन बिक जाएगा माटी के मोल, जग में रह जाएंगे प्यारे तेरे बोल’

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सरगम विज़न सोसायटी के बैनरतले सजी पाश् र्व गायक स्व. मुकेश के गाए गीतों की शाम

प्रतापगढ़, राजस्थान। पाश् र्व गायक स्व. मुकेशचन्द्र माथुर का निधन 27 अगस्त, 1976 को अमेरिका में एक स्टेज शो के दौरान दिल का दौरा पड़ने से हुआ। उस समय वह गा रहे थे- ‘एक दिन बिक जाएगा माटी के मोल, जग में रह जाएंगे प्यारे तेरे बोल’। सचमुच, दुनिया से ओझल हो चुके मुकेश के गाए बोल जग में आज भी गूंज रहे हैं और हमेशा गूंजते रहेंगे।उक्त बात कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सरगम विजन सोसायटी के अध्यक्ष चंद्रहास भट्ट ने एक शाम मुकेश के नाम कार्यक्रम की प्रस्तुति के दौरान उपस्थित श्रोताओं को संबोधित करते हुए कही।
इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि तहसीलदार गोपाललाल मेघवाल ने कहा कि सरगम विजन सोसायटी के बैनर तले आयोजित गीतों भरी शाम में मौजूद लोगों के लिये मुकेश के गाए हुए गीत की प्रस्तुतियां दवा का काम कर रहे हैं। इस गीतों भरी शाम ने दिनभर की थकान दूर कर दी है, ऐसे आयोजन निश्चित ही शहर में होने चाहिये। सरगम विजन सोसायटी समय समय पर देश के ख्यातनाम दिवंगत गायककारों को श्रद्धांजलि देने हेतु आयोजन करती है। इस माध्यम से स्थानीय प्रतिभाओं को भी अपनी आवाज का जादू बिखेरने का मौका मिलता है। सरगम विजन सोसायटी के सहयोग में जब भी जरूरत पड़ेगी, वे तन—मन—धन से सोसायटी के साथ रहेंगे।
इस अवसर पर विशिष्ठ अतिथि अविविनिलि के अधीक्षण अभियंता आर. सी. शर्मा ने कहा कि संगीत से शरीर का अंग—अंग उर्जित हो जाता है। संगीत वह जादू है जो गाने वाले और सुनने वाले दोनों का आनंदित करता है। सरगम विजन सोसायटी बधाई की पात्र है कि वह प्रतापगढ़ जिले की प्रतिभाओं को इस मंच के माध्यम से अवसर प्रदान कर रही है।
इस अवसर पर अर्चना छविगृह के एमडी इंद्रसेन शर्मा ने कहा कि वे स्वयं संगीतप्रेमी है और सरगम विजन सोसायटी के कार्यक्रमों की प्रस्तुति ने उन्हें भी प्रभावित किया है। उन्होने कहा कि अर्चना रिसोर्ट में आयोजन करके सोसायटी परिवार ने सहयोग हेतु हमें अवसर दिया इसके लिये हमें भी खुशी है। शर्मा ने कहा कि सामाजिक सरोकार के ऐसे किसी भी कार्य के लिये वे सदैव सोसायटी के साथ खड़े रहेंगे।
कार्यक्रम का संचालन शत्रुघ्न शर्मा ने किया, जबकि आभार की रस्म राजेन्द्र शर्मा ने अदा की। कार्यक्रम देर रात्रि तक चला। कार्यक्रम में प्रबु्द्ध जनों में आयुर्वेद विभाग के सेवानिवृ​त्त उप निदेशक डॉ. के.सी. पाठक, पेंशनर समाज के जिलाध्यक्ष कृष्णलाल पंचौली, वरिष्ठ अध्यापक कैलाशचंद्र बोराणा, राजेश तोमर, गोपाल टांक, विपिन जोशी, सतीश सोलंकी, रेखा सोलंकी, नूतन भट्ट, विजयबाला पण्ड्या, ज्योति शर्मा, शकुंतला शर्मा, भावना सोनी सहित बड़ी संख्या में श्रोता एवं सोसायटी परिवार के सदस्य मौजूद थे।
कार्यक्रम की जानकारी देते हुए सह सचिव राकेश सोनी ने बताया कि कार्यक्रम के प्रारंभ में मुख्य अतिथि कार्यवाहक तहसीलदार गोपाललाल मेघवाल, कार्यक्रम के अध्यक्ष चंद्रहास भट्ट, विशिष्ठ अतिथि अर्चना छविगृह के एमडी इंद्रसेन शर्मा, अविविनिलि के अधीक्षण अभियंता आर.सी. शर्मा, आयकर विभाग के हिमांशु, नायब तहसीलदार प्रभुलाल, सोसायटी के संरक्षक चंद्रशेखर जोशी व शेख मोहम्मद आसिफ हुसैन आदि ने मां सरस्वती व स्व. मुकेश के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलन व माल्यार्पण किया। अतिथियों का स्वागत सोसायटी के चयन ​कमेटी के अध्यक्ष मुस्तफा भाई होटलवाला, सह कोषाध्यक्ष जगदीश पण्ड्या, राजेन्द्र शर्मा, भरत व्यास, दीपक पालीवाल, ललित विश्नावत, शत्रु्घ्न शर्मा, महेश व्यास, कमलेश नागर इत्यादि ने किया।

इन्होने दी प्रस्तुतियां—

कार्यक्रम का संचालन करते हुए शत्रुघ्न शर्मा ने कार्यक्रम के संयोजक ललित विश्नावत को ईश वंदना के लिये आमंत्रित किया। विश्नावत ने मां शारदे पर आधारित गीत की प्रस्तुति देकर माहौल को भक्तिमय बना दिया। तत्पश्चात् अरनोद के प्रीतम जैन को आमंत्रित किया जिन्होने चंदन सा बदन गाकर माहौल को श्रृंगारित कर दिया। इसी क्रम में भरत व्यास द्वारा सुहानी चांदनी रातें हमें सोने नहीं देती, जगदीशचंद्र पण्ड्या द्वारा चांद सी महबूबा हो कब ऐसा मैंने सोचा था, चंद्रहास भट्ट ने वो तेरे प्यार का गम, राजेन्द्र शर्मा ने आंसू भरी ये जीवन की राहें, राकेश सोनी ने हम तुमसे महोब्बत करके सनम, शत्रुघ्न शर्मा ने कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है, राजेश सुमन ने दीवानों से ये मत पूछो, लोकेन्द्र विश्नावत ने चांद आंहे भरेगा, अनिल बण्डी ने मुझको इस रात की तन्हाई में, खुमानसिंह ने सजनवा बैरी हो गए, संजय गिरि गोस्वामी ने जिस गली में तेरा घर ना हो बालमा, तनु विश्नावत ने सावन का महीना, जगदीश टेलर ने कोई जब तुम हृदय तोड़ दे, गोपाल जाखड़ा ने मैं पल दो पल का शायर हूं गीत की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम की समाप्ति संयोजक ललित विश्नावत द्वारा प्रस्तुत  ‘इक ​दिन बिक जाएगा माटी के मोल’ नामक गीत से हुई।

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