भय अवश्य होना चाहिए लेकिन पुलिस से नही सिर्फ कानून से – राहुल बारहठ

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चूरू पुलिस गौरवश्री अवार्ड्स 2018 के तहत आयोजित किया टाॅक शो

चूरू। फिल्मस्थान  चूरू पुलिस गौरवश्री अवार्ड्स के तहत शनिवार को राजकीय बागला उच्च माध्यमिक  विद्यालय में पुलिस आमजन संवाद का आयोजन किया गया। टाॅक शो के दौरान चूरू पुलिस के अधिकारियों व आमजन के बीच पुलिस सुधार विषय पर सकारात्मक खुली चर्चा हुई। टाॅक शो कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए जिला पुलिस अधीक्षक राहुल बारहठ ने कहा कि भय अवश्य होना चाहिए लेकिन पुलिस से नही सिर्फ और सिर्फ कानून से, यदि किसी ने गलत काम/अपराध किया है तो उसे कानून एवं पुलिस का भय होना जायज है मगर यदि किसी ने कोई अपराध नही किया है तो उसे भयमुक्त रहने का अधिकार भी है एवं ऐसी व्यवस्था बनाए रखना पुलिस का यह कर्तव्य भी है क्योंकि कानून का वर्चस्व स्थापित करना ही पुलिस का लक्ष्य है। इसके साथ ही पुलिस का व्यवहार भी जनता के प्रति मानवाधिकारों का सम्मान करते हुए सौहार्दपूर्ण होना चाहिए। जनता के प्रति उत्तारदायी होते हुए समाज के प्रत्येक वर्ग को पुलिस द्वारा आवश्यक सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए।
पुलिस रिफाॅर्म/सुधार विषय पर जानकारी देते हुए श्री बारहठ ने बताया कि भारत देश ने अनेक क्षेत्रों में तरक्की की है परन्तु पुलिस ढांचा आज भी वही है। वर्तमान में समाज आमजन व शासक वर्ग सभी की अपने-अपने स्तर पर पुलिस से अपेक्षाएं रहती है मगर उनकी पूर्ति हेतु आवष्यक संसाधनों की कमी सदैव खलती रही है। काफी लम्बे समय से पुलिस में परिवर्तन व सुधार की विस्तृत संस्तुतियां की गई है परंतु पूर्ण रूपेण इन्हे लागू नही किया जा सका है। उन्होने यूपी के पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह द्वारा दायर याचिका पर माननीय सप्रीम कोर्ट ने पुलिस सुधार हेतु 2006 में पारित आदेश के प्रमुख बिंदुओं से अवगत करवाया। जिसमें पुलिस इन्फ्रास्ट्रेक्चर, जनशक्ति, वाहन, संचार व्यवस्था और फोरेंन्सिक संसाधानों में अपेक्षित सुधार एवं अधिनस्थ कर्मचारियों के लिए पर्याप्त आवासीय व्यवस्था के साथ-साथ पुलिसकमिर्मयों की हार्ड ड्यूटी में सेवा घंटो की व्यापक समीक्षा शामिल रहे।
उन्होने पुलिस विभाग में प्रत्येक स्तर पर न्यूनतम दो वर्ष के कार्यकाल की नियुक्ति पर बल देते हुए कहा कि जब तक कोई विषेष आरोप जैसे भ्रष्टाचार इत्यादि ना हो सरकार द्वारा विभाग में नियुक्त अधिकारीयों/कर्मचारियों का स्थानांतरण कम से कम दो वर्ष से पहले ना हो ताकि नियुक्त पुलिसकर्मी दबावमुक्त व तनावमुक्त रहते हुए क्षेत्र में बेहतर पुलिस व्यवस्था को अंजाम दे सके।
पुलिस उप अधीक्षक आईपीएस केसर सिंह ने कानून एवं नियमों के साथ आम व्यक्ति के अधिकारों पर चर्चा करते हुए पुलिस और कानून व्यवस्था की व्याख्या की। उन्होने कहा कि आदिकाल से आज व भविष्य तक पुलिस सदैव चिंतन का विषय रहा है और रहेगा। पुलिस व्यवस्था के आदर्ष स्वरूप पर सार्थक चर्चा करते हुए आमजन को उनके दायित्व व जिम्मेदारियों तथा पुलिस के कत्र्तव्यों से अवगत करवाया। उन्होने कहा कि पुलिस विहिन समाज की कल्पना ही विभत्सकारी है। समाज के व्यवस्थित विकास व व्यवस्था प्रवाह में पुलिस का एक महत्वपूण योगदान सदैव रहा है। किसी भी शास्ती ’एनफाॅर्समेंट’ का उद्देष्य केवल भय पैदा करना ही नही होता है बल्कि समाज में कानून की अवधारणा को लागू कर न्याय को हर स्तर, हर वर्ग के लोगों तक उपलब्ध करवाना ही होना चाहिए जिस प्रकार मां अपने बच्चे को डर दिखा उसे कर्म, आचरण व नैतिकता की राह की ओर अग्रसर करती है उसी प्रकार पुलिस की प्रत्येक कार्रवाही में भी समाज में सुरक्षा व्यवस्था व  न्याय के सिद्धांत को स्थापित करने का उद्देश्य निहित रहता है।
वृत्ताधिकारी चूरू हुकम सिंह ने कम्यूनिटिंग व्यवस्था पर जोर देते हुए कहा कि प्रदेश में  बेहतर सुरक्षा व्यवस्था एवं संतुलन के लिए कम्यूनिटि पुलिसिंग अत्यंत आवष्यक है। जितना अधिक हम सब लोग अपनी जिम्मेदारियों को समझ एकमेव होकर सुरक्षा व्यवस्था हेतु सहयोग करेगें उतना ही बेहतर पुलिस व्यवस्था बेहतर हो पाएगी। चर्चा में स्वच्छ छवि वाले व्यक्तियों की सीएलजी सदस्यों के रूप में नियुक्ति पर भी चर्चा हुई।
मंच पर राहुल बारहट, केसर सिंह शेखवात, हुकुम सिंह, सांवर मल गहनोलिया, किशन लाल गहनोलिया, ओम प्रकाश प्रजापत, रामकरण फगेड़िया उपस्थित थे। इसके अतिरिक्त सभी सीएलजी सदस्य, कार्यक्रम समन्वयक अमित कुमार, टैगोर कोचिंग सेंटर कुचामनसिटी से कृष्ण कुमार, कायम सोलर से  हिदायत अली खान, सुरेन्द्र प्रजापति, गोविन्द लुगरिया, गोविन्द शर्मा सहित बडी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित थे।संवाद में मुकुल भाटी ने योजक भूमिका निभाई।

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