गीतों के साथ देगें ‘शहंशाह-ए-तरन्नुम’ को श्रद्धांजली

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मोहम्मद रफ़ी

जयपुर। हिन्दी सिनेमा के श्रेष्ठतम पार्श्व गायको में से एक मोहम्मद रफ़ी जिन्हे दुनिया रफ़ी साहब के नाम से पुकारती है। रफ़ी साहब की पुण्य तिथी के अवसर पर जयपुर की साज और आवाज कल्चरल सोसायटी की ओर से रंगारंग कार्यक्रम ‘तुम जो मिल गए हो’ के साथ ‘शहंशाह-ए-तरन्नुम’ कहे जाने वाले रफ़ी साहब को श्रद्धांजली अर्पित की जाएगी।
संस्था के सेकेट्री जुल्फीकार अली और उपाध्यक्ष मुनव्वर अली ने जानकारी देते हुए बताया कि कार्यक्रम का आयोजन जेएलएन मार्ग स्थित ‘कलानेरी आर्ट गैलरी’ प्रांगण में किया जाएगा जंहा शहर के जाने माने गायक अपने गीतों से रफ़ी साहब को श्रद्धांजली अर्पित करेंगें।
मोहम्मद रफ़ीउन्होने बताया कि कार्यक्रम के दौरान मुनव्वर अली, जय शर्मा, मुक्ता सिंघवी, विजय शर्मा, असलम बेग, मुसिन अब्दुल्ला और सिराज सहित अनेक गायक अपनी आवाज का जादू बिखेरेगें जबकि साउंड पर मो. नईम​ शिरकत करेंगें। एंट्री पास के लिए कार्यालय समय में कलानेरी आर्ट गैलरी परिसर में सम्पर्क किया जा सकता है।
आपको बता दे कि मोहम्मद रफ़ी का जन्म 24 दिसंबर 1924 को पंजाब प्रांत में हुआ था और 31 जुलाई 1980 को उनका निधन हो गया था। रफ़ी साहब की आवाज ने अपने आगामी दिनों अनेक गायको को प्रेरित किया था जिनमें सोनू निगम, मुहम्मद अज़ीज तथा उदित नारायण का नाम उल्लेखनीय है। 1940 से 1980 तक के अपने 40 साल के अपने करियर में रफ़ी साहब ने 2600 से अधिक गाने गाये थे। इनमें मुख्य धारा हिन्दी गानों के अतिरिक्त गज़ल, भजन, देशभक्ति गीत कव्वाली तथा अन्य भाषाओं में गाए गए गीत शामिल है।

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