फोक संगीत को रोक फ्यूजन में सुनाया बैंड समरसौल्ट ने ।

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इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय के 41वें स्थापना दिवस समारोह के अंतिम दिन बैंड समरसाल्ट ने पहली बार भोपाल में प्रस्तुति दी। इस अवसर पर बैंड ने खासी लोकगीतों और रॉक म्यूजिक के ट्रांसफ्यूजन को सुनाया। शिलांग को कैपिटल ऑफ रॉक म्यूजिक के नाम से जाना जाता है। इस बैंड ने हाल ही में रिलीज हुई बॉलीवुड फिल्म रॉकऑन 2 में अपने गीत की भी प्रस्तुति दी, जिसे उन्होंने यहां भी सुनाया। इस बैंड का संगीत क्रॉस क्रॉस्ड शैली का है, जिसमें पश्चिम रॉक की ऊर्जा, खासी पहाड़ियों का जैज, स्वदेशी संगीत की मधुरता, ब्लूज संगीत के कुछ अंश हैं। इससे पूर्व मेघालय के प्रख्यात बैंड, पिंटर ऑर्केस्ट्रा की प्रस्तुति के साथ हुई बैंड ने सर्वप्रथम पेंटर ऑर्केस्ट्रा खासी जनजाति के प्राचीन संगीत वाद्ययंत्र बजाने वाले कलाकारों का बैंड है। इस अवसर पर उन्होंने – खासी सतार, दूतार, मृंगोड (वायलिन की तरह दिखते हैं), केसिंग कीथियेई,केसिंग शिनसांग, शॉ शॉ और पदियाह आदि पारंपरिक वाद्ययंत्र बजाये। तत्पश्चात मेघालय से आये कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य एवं गीतों की प्रस्तुति दी। प्रथम प्रस्तुति में मेघालय के गारो जनजाति के कलाकारों ने दोरोआ गीत एवं वंगाला नृत्य की प्रस्तुति दी। यह गीत अलिखित विद्या,कहानियां और नीतिवचन, पहेलियों और गीत सांस्कृतिक प्रथाओं से उत्पन्न होते हैं। यह विशेष गीत कौन वास्तविक उपहार देने वाला है सवाल कर रहे है तथा वांगाला नृत्य की शुरुवात कैसे हुई। अगली प्रस्तुति में खासी कलाकारों ने नए निर्मित घर में प्रवेश करने से पहले किये जाने वाले नृत्य शाद स्केन का प्रदर्शन किया। मेघालय के खासी लोग मानते हैं कि जीवन के हर क्षेत्र में अलौकिक शक्ति है जो त्योहार, नृत्य या अनुष्ठान, सेवा सभी में मौजूद रहते है।

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