भाषा के माध्यम से ही बचेगी लोक संस्कृति: टाक

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प्रयास संस्थान का राजस्थानी साहित्य पुरस्कार समारोह सम्पन्न, डाॅ देव कोठारी, नंद भारद्वाज, आनंदकौर व्यास एवं रीना मेनारिया हुए पुरस्कृत


चूरू। भाषा मूल रूप से संस्कृति की वाहक होती है, किसी भी प्रांत एवं देश की भाषा बचाने का अर्थ है कि हम उस इलाके की संस्कृति को बचा रहे हैं। भाषा के माध्यम से संस्कृति संरक्षित होती है। संस्कृति का हर एक उपादान भाषा के माध्यम से संचालित होता है और भाषा का हर एक पहलू संस्कृति में रमा होता है। दोनों का यह उभयपक्षीय रिश्ता कायम रहेगा, तभी मानव होने का मतलब कायम रहेगा।
यह विचार स्थानीय सूचना केंद्र में शनिवार शाम साहित्यकार मीठेश निर्मोही की अध्यक्षता में हुए प्रयास संस्थान के राजस्थानी साहित्य पुरस्कार समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोलते हुए राजस्थान सरकार के पूर्व मंत्राी अश्क अली टाक ने व्यक्त किए। टाक ने कहा कि राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता मिलना बहुत जरूरी है। इसके लिए हम सभी को बगैर राजनीतिक मतभेदों के एक होना होगा। दीप प्रज्ज्वलन से प्रारंभ हुए समारोह में अतिथियों ने उदयपुर के डाॅ. देव कोठारी को इक्यावन हजार रुपये का कन्हैयालाल पारख राजस्थानी साहित्य पुरस्कार, जयपुर के नंद भारद्वाज को कथाकृति ‘बदळती सरगम’ के लिए ग्यारह हजार रुपये का बैजनाथ पंवार कथा साहित्य पुरस्कार, बीकानेर की लेखिका आनंदकौर व्यास को उपन्यास ‘मून रा चितराम’ के लिए ग्यारह हजार रुपये का सावित्राी चैधरी खूमसिंह साहित्य पुरस्कार तथा उदयपुर की युवा उपन्यासकार रीना मेनारिया को उपन्यास ‘पोतीवाड़’ के लिए दुर्गेश युवा साहित्यकार पुरस्कार प्रदान किया। इस अवसर पर सम्मानित साहित्यकार देव कोठारी ने कहा कि राजस्थान के मेवाड़ से लेकर थली अंचल तक की भाषा एक राजस्थानी ही है, जिसमें हम सब बोल रहे हैं, लिख-पढ रहे हैं। भाषा हमारे होने का अर्थ है। बैजनाथ पंवार पुरस्कार से सम्मानित नंद भारद्वाज ने कहा कि कोई व्यक्ति संस्थान कैसे बनता है और संस्थान भाषा के लिए कैसे काम करता है, चूरू की संस्थाएं इसका उदाहरण हंै। पुरस्कृत लेखिका आंनदकौर व्यास ने कहा कि महिला लेखन को सम्मानित करना सामयिक मांग है। सम्मानित युवा लेखिका रीना मेनारिया ने कहा कि युवा जब साहित्य में आएंगे तब भाषा की महक और विस्तारित होगी।
समारोह अध्यक्ष जोधपुर से पधारे वरिष्ठ साहित्यकार मीठेश निर्मोही ने कहा कि राजस्थानी ही वह भाषा है जो राजस्थान का प्राचीन इतिहास अपने अंदर समेटे हुए है। सामयिक ऐतिहासिक व्याख्याओं को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि हमें साहित्य की ओर लौटना ही होगा, तभी हम यथार्थ से परिचित होंगे। समारोह में बतौर सहयोगियों के दानाराम सहारण, सुरेश लांबा, शंकरलाल सैनी, हनुमान कोठारी एवं जमील चैहान का सम्मान किया गया। संस्थान की भूमि के लिए एक लाख पच्चीस हजार रुपये का सहयोग देने के निमित्त मीठेश निर्मोही का भी अभिनंदन किया गया। प्रयास संस्थान के अध्यक्ष दुलाराम सहारण ने स्वागत भाषण दिया।  संरक्षक हनुमान कोठारी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। संचालन संस्थान सचिव कमल शर्मा ने किया। समारोह में साहित्यकार भंवरसिंह सामौर, पुलिस उपअधीक्षक हुकमसिंह, कांग्रेस नेता हुसैन सैयद, पूर्व प्रधान रामनाथ कस्वां, डाॅ. रामकुमार घोटड़, फतेहचंद सोती, हनुमानाराम ईसराण, आशीष दाधीच, रघुनाथ खेमका, माधव शर्मा पत्राकार, छात्रानेता नितिन बजाज, आशीष माटोलिया, पुलकित चैधरी, विकास मील, हेमंत सिहाग, रफीक चैहान, डाॅ. मूलंचद, संजय कस्वां, राजकुमार लाटा, श्याम जांगिड़, श्रीभगवान सैनी, पूर्व सभापति चांद मोहम्मद छींपा, उम्मेद गोठवाल, संजय गोयल, बाबूलाल शर्मा सहित गणमान्य उपस्थित रहे।

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