उम्मीद को याद रखें, यह जिन्दा शब्द – निखिल सचान

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चूरू । चूरू पुलिस,फिल्मस्थान एवं संप्रीति संस्थान द्वारा कम्युनिटी पुलिसिंग अंतर्गत जारी ऑनलाइन सेशन श्रृंखला में आज के दूसरे सत्र में युवा लेखक और कवि निखिल सचान जनता से रूबरू हुए। ‘ नमक स्वादानुसार, आइस पाइस और यूपी 65 जैसी बेस्ट सेलर किताबों के लेखक निखिल सचान ने जनता को अपने कई रूप बातों को दौरान सुनाए। निखिल ने जनता के साथ बचपन की मासूमियत और युवावस्था के सपनों को साझा कर सभी श्रोताओं को यादों के झरोखे में पहुंचाया।
जहां से झांकने पर हर किसी को अपना बचपन,लड़कपन और युवा दहलीज के सपने और दोस्तों की शरारतें याद आती है।निखिल की बातों ने श्रोताओं की आंख के कोर को गीला कर दिया ये आंखों से बहते झरने मानो जगजीत सिंह की मखमली आवाज में वो ग़ज़ल याद दिला रहे थे ‘यह दौलत भी ले लो यह शोहरत भी ले लो …मुझे लौटा दो मेरे बचपन के दिन वो कागज की कश्ती वो बारिश का पानी’ निखिल ने कोरोना लॉकडाउन पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि इस लॉकडाउन के बाद समाज में ऑटो रिक्शा चालक और कामवाली बाइयों का सम्मान अधिक बढ़ जाएगा। उन्होंने कहा कि इस दौरान बच्चों को अपने माता-पिता से, पति को पत्नी से और दोस्तों और बच्चों को आपस में खूब बातें करनी चाहिए उन्हें इस बात का एहसास दिलाना चाहिए कि हमें उनका दिल से ख्याल है। निखिल ने उम्मीद व्यक्त की कि इस लॉकडाउन के बाद एक नया भारत सभी को दिखेगा क्योंकि बड़े बड़े देश जो काम नहीं कर पाए वह हमने कर दिखाया है। उन्होंने कहा कि हम सभी को कोरोना वायरस के दौरान अपनी उम्मीदों को जिंदा रखना चाहिए क्योंकि उम्मीद एक जिंदा शब्द है। निखिल ने अपने पापा के वेस्पा स्कूटर की आवाज के जरिए माता पिता,पुत्र और माता पिता पिता व पिता- पुत्र के संबंधों को बड़े सहज लेकिन गहराई से रेखांकित किया ।दिलों में एहसास जगाते हुए अपनी प्रेमिका के लिए उनकी कविता ‘ मैं खोजता हूं तुम्हें, जैसे कोई मजदूर दिनभर की मजदूरी के बाद बीड़ी के बंडल को ढूंढता है सुनाई। यह कविता उनके समाजवादी विचारों को पुरजोर तरीके से मुखरित करती है।सोशलिस्ट तरीके से प्रेमिका को याद करने के बाद निखिल के मन में बसा संवेदनशील इंसान कविता मुसलमानों का मौहल्ला के रूप में मुखरित हुआ।

Live with Nikhil Sachan – Author of UP 65, Namak Swadanusar and Zindagi Aaispais

Posted by SP Churu on Saturday, May 9, 2020

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