नाटक के माध्यम से बताया सांपों के संरक्षण का महत्व

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जयपुर। रवीन्द्र मंच पर फ्राइडे थिएटर के तहत वरिष्ठ रंगकर्मी साबिर खान के निर्देशन में कवि ताराप्रकाश जोशी लिखित नाटक ‘दूधां’ का मंचन हुआ। नाटक में भारज जैसे कृषि प्रधान देश में सांपों के महत्व को बताया गया है। कालबेलिया जाति के लोगों की धारणा है कि सांप नही होगें तो चूहे किसानों की फसलों का बबार्द कर देगें। इसलिए वे पारंपरिक रूप से सांपों को पालते है और उनका संरक्षण करते है। समुदाय के कुछ लोग तात्कालिक लाभा के लिए सांपों को तस्करों को बेचने का प्रयत्न करते है। सांपों को बचाने के लिए इसी समुदाय की एक लड़की हवनकुण्ड में अपनी आहुति देकर समाज में चेतना पैदा करती है। साबिर खान ने रंगमंच की समकालीन शैली को बेहतर अंदाज में जीवंत किया।

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