रजवाडों के विलासी जीवन को दर्शाता है ‘शतरंज के खिलाडी’

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चंडीगढ। पंजाव संगीत नाटक अकादमी के बैनर तले आयोजित थियेटर फेस्टिवल में शतरंज के खिलाडी का मंचन किया गया। प्रसिद्ध उपन्यासकार प्रेमचन्द के उपन्यास पर आधारित नाटक का मंचन पंजाबी भाषा में किया गया। 50 मिनिट के नाटक का निर्देशन गुरप्रीत भुल्लर ने किया। नाटक में दिखाया गया कि लखनऊ शहर में राजनीतिक सामाजिक चेतना शून्य हो गई है। यहां के राजा और नवाब भोग विलास में डूबे हुए हैं। कहानी के अनुसार मिर्जा सज्जाद अली और मीर रौशन अली दोनों वाजिद अली शाह के जागीरदार हैं। जीवन की बुनियादी जरूरतों के लिए उन्हें कोई परवाह नहीं है। दोनों गहरे मित्र हैं और शतरंज खेलना उनका मुख्य काम है। रोज-रोज के इस खेल से उनकी बीवी भी परेशान हो जाती है और तंग आकर उनकी बीवी शतरंज को बाहर फेंक देती हैं। एक दिन दोनों मित्र शतरंज की बाजियों में खोये हुए थे कि उसी समय बादशाही फौज का एक अफसर मीर साहब का नाम पूछता हुआ आ खड़ा होता है। उसे देखते ही मीर साहब के होश उड़ गए। वह शाही अफसर मीर साहब के नौकरों पर खूब रोब गालिब करता है। मीर के न होने की बात सुनकर अगले दिन आने की बात करता है। इस प्रकार यह तमाशा खत्म होता है।

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