नाटक में दिखाया प्रेम कहानियों के पीछे छिपे दर्द को

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 नाटक कला एवं संस्कृति विभाग के सहयोग से किया गया बांग्ला नाटक ”पागल घोड़ा” का मंचन।

जयपुर। फाईडे थियेटर के तहत शुक्रवार को रंविन्द्र मंच के स्टूडियों थिएटर में बांग्ला नाटक ‘पगला घोड़ा’ के हिन्दी रूपान्तरण का मंचन हुआ। बादल सरकार लिखित नाटक का निर्देशन जयपुर थिएटर में हिन्दी एब्सर्डं नाटको के लिए पहचाने जाने वाले रंगकर्मी राजेन्द्र सिंह गहलोत ने किया। नाटक कला एवं संस्कृति विभाग के सहयोग से आ​योजित नाटक में पुरूष मानसिकता का वह रूप दिख, जिसमें महिलाएं प्रताड़ित होती है। नाटक एक श्मशान के दृश्य से शुरू होता है। साउंड के माध्यम से लाश जलने का आभास कराया जाता है।
लाईट जलते ही चार पुरूष चरित्र कार्तिक, शशि, हिमाद्री और सातू मंच पर दिखते है। वे एक लड़की की लाश जलाने श्मशान घाट पर पंहुचते है। सभी मंच पर ताश खेलते नजर आते है। इस बीच वह लड़की पंहुचती है, जिसकी लाश जल रही है। वह एक—एक कर सभी पुरूषों से उनकी प्रेम कहानी पूछती है। सभी शराब के नशे में एक एक कर अपनी पेम कहानी बयां करते है। सभी प्रेम में व्यर्थ हैं और उनकी वजह से उनकी प्रेमिकाओं को जीवन देना पडता है। थोडी देर में शिक्षक हिमाद्री भी यहां पंहुचते है। उन्हे सीाी आदर्शवादी कहते है, लेकिन उनके भी प्रेम में महिलाओं को प्रताडित करने की बात उभरती है। जैसे—जैसे हर चरित्र अपनी कहानी कहता है, पाश्र्व से एक—एक कर महिलाओं की आवाजें गूंजती है। ये आवाजे ममता माथुर, कविता भट्ट और मोनिका सिंह भार्गव ने दी।
राजेन्द्र सिंह गहलोत ने नाअक में पाश्र्व स्वर देने वाली तीनों महिलाओं ममता मा​थुर, कविता भट्ट व मोनिका सिंह भार्गव का सम्मान भी किया। नाटक में लडकी का रोल प्ले करने वाली पूजा जांगिड़, सातू के रोल में दीपक गुप्ता, कार्तिक के रोल में राजेन्द्र सिंह गहलोत और हिमाद्री के रोल में अक्षय कुमार शर्मा ने अभिनय किया।

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