‘संस्कृति उत्सव’ का शुभारंभ आज से

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के संस्कृति विभाग द्वारा 17 से 19 मार्च तक गोमती नगर स्थित संगीत नाटक अकादमी परिसर में तीन दिवसीय ‘संस्कृति उत्सव : उत्तर प्रदेश’ का आयोजन किया जा रहा है। इस उत्सव में प्रदेश की कला एवं संस्कृति के साथ-साथ देश के अन्य राज्यों की कला विधाएं भी प्रस्तुत की जाएंगी. संस्कृति विभाग के सचिव एवं निदेशक डॉ. हरिओम ने बताया कि यह उत्सव प्रतिदिन दो चरणों में होगा. अपराह्न् एक से 4 बजे तक होने वाले प्रथम चरण में प्रदेश की लोक संस्कृति के विविध पहलुओं पर आधारित लोक नृत्य व लोक गायन प्रस्तुत किए जाएंगे. शाम 7 से 9:30 बजे तक होने वाले द्वितीय चरण में देश के विभिन्न लोक नृत्यों के साथ-साथ राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी.
प्रदेश के लोक नृत्य एवं लोक गायन कार्यक्रमों के तहत 17 मार्च को जादू, फरूवाही लोक नृत्य, नटवरी लोक नृत्य, अहिरवा लोक नृत्य, आल्हा लोक गायन एवं अन्य लोक गायन की प्रस्तुतियां होंगी.
18 मार्च को धोबिया लोक नृत्य, कजरी, आदिवासी लोक नृत्य, बिरहा एवं लोक गायन प्रस्तुत किए जाएंगे. इसी तरह 19 मार्च को राई लोक नृत्य, ख्याल-लावनी एवं कलगी तुर्रा, पाईडंडा, दीवारी लोकनृत्य, स्वांग, रागिनी, कठपुतली तथा लोक गायन की प्रस्तुतियां होंगी.
राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के तहत 17 मार्च को लखनऊ घराने का कथक नृत्य, असम का बिहू लोक नृत्य, छत्तीसगढ़ का पंथी लोकनृत्य, हरियाणा के घूमर, धमाल एवं जंगम लोक नृत्य, मध्यप्रदेश का राई लोक नृत्य, कश्मीर का लूर लोक नृत्य, चैती एवं ठुमरी तथा सूफी गायन प्रस्तुत किए जाएंगे.
18 मार्च को हरियाणा के फाग, रूफ एवं खोड़िया लोक नृत्य, कश्मीर का मेंहदीरात लोकनृत्य, असम का बारदोई सिकला लोक नृत्य, ओड़िशा का दालखाई लोक नृत्य, छत्तीसगढ़ का करमा लोकनृत्य तथा गजल की प्रस्तुतियां होंगी.
19 मार्च को उत्तराखंड का ऋतुरेण लोकनृत्य, कश्मीर का बछनगमा लोकनृत्य, असम का ग्वालपुरिया लोकनृत्य, छत्तीसगढ़ का राऊतनाचा लोकनृत्य, ओड़िशा का बजनिया लोक नृत्य तथा ताज सिफ्फनी की प्रस्तुतियां होंगी.
इस महोत्सव में अभिलेख प्रदर्शनी, पेंटर्स कैम्प, पुरातत्व एवं संग्रहालय द्वारा महत्वपूर्ण कला कृतियों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी. इसके अलावा अवधी व्यंजनों के भी स्टॉल लगाए जाएंगे.

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