फिल्म फेस्टिवल के फ़ाइनल में पहुंची मात्र 5 हज़ार में बनी ये फिल्म

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फिल्मे बनाना आसान काम नहीं है । फिल्म बनने में ना जाने कितने संसाधन खर्च होते हैं और अथाह पैसा भी लगता हैं । लेकिन इसके विपरीत इंसानी जज़्बा वो कर जाता है जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते ।

हम बात कर रहे हैं शॉर्ट फिल्म ‘तुरूप चाल’ के बारे में  लेकिन, एक फिल्म ऐसी भी है जो सिर्फ पांच हजार रुपए में बनकर तैयार हुई है। हम बात कर रहे हैं शॉर्ट फिल्म ‘तुरूप चाल’ के बारे में। यह फिल्म कैसी है इसका पता तो देखने के बाद चलेगा, लेकिन अपनी खासियत के कारण इस फिल्म ने देश के एक बड़े शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल के फाइनल में शामिल 44 फिल्मों में जगह बना ली है।

इस फिल्म को अब तक एक लाख 72 हजार व्यूज मिल चुके हैं।

‘तुरूप चाल’ को लेकर इस फिल्म के अभिनेता अनूप गोसांई कहते हैं कि हमारी फिल्म सीमित बजट में तैयार हुई है। वो बताते हैं कि इसे उन्होंने अपने दोस्तों के साथ मिलकर बनाया है। महज 15 दिन में पूरी फिल्म बनकर तैयार हुई है। इस फिल्म में केवल 5 किरदार हैं। फिल्म का निर्देशन सुमित कुमार ने किया है और फिल्म न्यू प्रोपेगेंडा मोशन पिक्चर के बैनर तले बनी है और व्यूज के मामले में दूसरी पोजीशन पर पहुंच चुकी है।

क्या है इस फिल्म की कहानी

तुरूप चाल की कहानी एक कॉमन मैन, एक फायनेंसर और पुलिसवाले के इर्द-गिर्द घूमती है। एक आदमी जो ईमानदारी से जीना चाहता है, लेकिन परिस्थितियां उसके खिलाफ हैं। वो घर से अपने लोन की रकम चुकाने निकलता है और जब फायनेंसर के पास पंहुचता है तब तक उसके पैसे चोरी हो जाते हैं। इसके बाद इस कहानी में एक पुलिसवाले की एंट्री होती है। फायनेंसर और पुलिसवाला उसे जलील करते हैं। एक सीन में नकली रसीद लेने के सवाल पर कॉमन मैन कहता है- ‘पक्की लेता तो दस फीसदी देना पड़ता और …क्या सारे देशभक्ति की जिम्मेदारी मेरी ही है?’ ऐसे सवाल आम आदमी के जेहन में अक्सर आ ही जाते हैं? फिल्म एक अनएक्सपेक्टेड क्लाइमैक्स के साथ खत्म होती है।

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