मजबूत कहानी के दम पर धमाल मचा रही है “फिल्लौरी” ।

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कास्ट : अनुष्का शर्मा, दिलजीत दोसांझ, सूरज शर्मा

डाइरेक्टर : अंशाई लाल

अनुष्का शर्मा की फिल्म फिल्लौरी फिल्म से जुड़े कई लोगों के लिए खास थी। सबसे पहले तो फिल्म के डायरेक्टर जी हां अंशाई लाल के लिए यह फिल्म खास थी क्योंकि इस फिल्म के जरिए उन्होंने बतौर डायरेक्टर अपने करियर की शुरुआत की है। इसके बाद अनुष्का शर्मा के लिए यह फिल्म इसलिए खास है क्योंकि अनुष्का ने ना केवल इस फिल्म में एक्टिंग की है। बल्कि वो इस फिल्म की प्रोड्यूसर भी हैं। इसके बाद बात करते हैं पंजाबी हार्टथ्रोब दिलजीत दोसांझ की, उनके लिए फिल्म खास इसलिए है क्योंकि इसमें वह फिल्म के हीरो हैं। वो अनुष्का शर्मा यानी शशि के लवर हैं। इससे पहले वह उड़ता पंजाब में नजर आए थे। इस फिल्म में उन्होंने इंप्रेसिव रोल निभाया था। लेकिन फिल्म के हीरो शाहिद कपूर थे।

अब बात करते हैं फिल्म की…कहानी की शुरुआत शादी और बैंड बाजे से होती है। विदेश से दूल्हे साहब आ रहे हैं। जिनके इंतजार में उनका पूरा परिवार एयरपोर्ट पहुंचा हुआ है। यहां से कहानी की शुरुआत होती है। फिल्म में एंट्री होती है लड़कीवालों की। आप सोच रहे होंगे कि बात यहां तक पहुंच गई और अभी तक अनुष्का शर्मा की एंट्री नहीं हुई तो बता दूं कि थोड़ा इंतजार कीजिए। लड़कीवाले और कन्नन (सूरज शर्मा) का परिवार एक पंडित के पास पहुंचते हैं। पंडित बताता है कि लड़का मांगलिक है और इसकी शादी पहले एक पेड़ से करानी होगी ताकि आगे की जिंदगी में परेशानी ना आए। कन्नन जो कि विदेश से आया है उसे यह आइडिया थोड़ा अजीब लगता है। लेकिन फैमिली के कहने पर वह इसके लिए राजी हो जाता है। अब ये सभी मिलकर फिल्लौर के लिए निकलते हैं। जहां कन्नन की शादी पेड़ से कराई जाती है। फिर क्या शादी के बाद जैसे होता ही है कि दुल्हन घर आती है। इस पेड़ पर रह रही शशि की आत्मा भी कन्नन के साथ घर आजाती है।

ये भूत केवल क्यूट ही नहीं बेहद खूबसूरत भी है। सुनहरे और सफेद रंग के कपड़ों में अनुष्का कमाल लग रही हैं। लेकिन कन्नन इनसे डरता है। सूरज शर्मा जिन्हें आप लाइफ ऑफ पाई में भी देख चुके हैं। उन्होंने अच्छी परफॉर्मेंस दी है। एक कनफ्यूज, घबराए हुए लड़के के रोल में वह परफेक्ट दिखे हैं। अब कहानी की बात करूं तो इस फिल्म में कन्नन की शादी के साथ-साथ फ्लैशबैक भी चल रहा है। कन्नन की सगाई के दिन म्यूजिक रिकॉर्ड देखकर शशि को अपने गांव की याद आती है और शुरू होता है फ्लैश बैक।दिलजीत दोसांझ की एंट्री एक गाने के साथ होती है। दिलजीत दोसांझ एक मस्तमौला शख्स है जिसे गाने और कविता लिखने का शौक है। एक बात जो फिल्म में एक्साइटमेंट बनाए रखती है वो यह कि अनुष्का आखिर मरती कैसे हैं। यह कहानी धीरे-धीरे खुलती है। फिल्म का एक कनेक्शन जलिया वाला बाघ की घटना से भी है। यह भी फिल्म का एक जबर्दस्त ट्विस्ट है।

सभी कलाकारों की परफॉर्मेंस अच्छी है। फिल्म के गाने इसे बोरिंग नहीं बनाते। फिल्म का आखिरी सीन आपको लंबा लग सकता है। लेकिन शायद डायरेक्टर इमोशन्स को अच्छे से पर्दे पर उतारना चाहते थे इस कोशिश में उन्होंने यह सीन लंबा रखा।

इसलिए यदि आप कुछ हटकर देखने का मन बना बना रहे हैं तो फिल्लौरी ज़रूर देखनी चाहिए ।

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