मालवा लिखारी सभा ने केंद्रीय पंजाबी लेखक सभा के सहयोग से मंदिर श्री मनसा देवी में वार्षिक समागम करवाया। समागम में शिरोमणि पंजाबी कवि पदम श्री डा. सुरजीत पातर मुख्य मेहमान के तौर पर पहुंचे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि लोक बोली में लिखा साहित्य ही लोक साहित्य बनने के समर्थ होता है।
स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए स्वस्थ साहित्य लिखना बेहद जरूरी है। शिरोमणि पंजाबी कवयित्री सुख¨वदर अमृत ने कविताएं पेश की। डॉ. जोगा ¨सह ने कहा कि जो बच्चे शुरू से ही अपनी मातृ भाषा में पढ़ाई नहीं करते, वह दूसरी भाषाओं में भी महारत हासिल नहीं कर सकते। शहीद भगत ¨सह एक विचारधारा है। लेखक आलोचक डॉ. सुरजीत बराड़ ने अपने साथियां दी नजर विच.. भगत ¨सह पर्चा पढ़ा।
समागम की प्रधानगी डॉ. जोगा ¨सह, सीनियर उपप्रधान केंद्रीय पंजाबी लेखक सभा ने की। प्रधानगी मंडल में सु¨रदरप्रीत घणीया उपप्रधान, सु¨रदर कौर बाड़ा प्रधान पंजाबी सभ्याचारक नारी मंच, उस्ताद गजलकार सुलखन मीत, डॉ. मीत खटड़ा, कर्म ¨सह जख्मी, रजिन्दर ¨सह राजन शामिल हुए। साहित्यकार निरंजन बोहा को डॉ. प्रीतम सैणी वारतक पुरस्कार, अर¨तदर संधू को म¨हदर मानव कविता पुरस्कार, भूपिंदर फौजी को श्रीराम सरूप अणखी गलप पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस दौरान मलकीत ¨सह ग्रेवाल का काव्य संग्रह होए पुत्त जवान, ऋतु वासुदेव का काव्य संग्रह इक्क इस दौरान मलकीत ¨सह ग्रेवाल का काव्य संग्रह होए पुत्त जवान, ऋतु वासुदेव का काव्य संग्रह इक्क बूटा बिरहा दा, जगजीत ¨सह लड्डा का बाल गजल संग्रह साडे रहबर, जगसीर जोगी भूटाल का बाल काव्य संग्रह उड़ान, रा¨जदर ¨सह राजन का बाल काव्य संग्रह घोर कंडे चूहे लंडे शहीद भगत ¨सह संबंधी लिखे गीत का पोस्टर लोक अर्पण किया गया।
































