पिछले कई सालों से हिन्दुस्तान का माहौल कुछ बदल सा गया है। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक हर प्रांत में कोई न कोई एक ऐसी समस्या है जिसका समाधान देश के राजनेता भी सुलझा नहीं पा रहे हैं। आसाम की अपनी समस्या है, तो महाराष्ट्र की अपनी समस्या। उसी तरह कश्मीर की अपनी समस्या है और इस समस्या का नाम है ‘ज़ेहाद’।
पिछले कई वर्षों से फिल्मों के निर्माताओं ने और नायकों ने भी कुछ ऐसे ही समस्याओं पर फिल्मों पर काम करने का ध्यान दिया है। ऐसा नहीं है कि ऐसे विषयों पर अभी-अभी ही फिल्मों का निर्माण होना शुरु हुआ है। आपको बता दें कुछ ऐसे विषय लेकर वर्षों पहले हिन्दुस्तान और चीन के लड़ाई के मुद्दे पर भी फिल्म बनी थी जिसका नाम था ‘हक़ीक़त’। ऐसी कई मिसालें हैं जिसके विषय पर निर्माण होता रहा है। लेकिन हाल का फिल्मी दुनिया का माहौल कुछ ऐसा बदला है कि हर निर्माता निर्देशक अपनी फिल्म अलग विषय लेकर उसके निर्माण में लगा हुआ है।
एक्टर-निर्माता हैदर काज़मी भी कुछ ऐसा ही करने जा रहे हैं। उन्होंने ज़ेहाद का मुद्दा लेकर अपनी नई फिल्म ‘ज़ेहाद’ की शूटिंग पूरी कर ली है। ‘ज़ेहाद’ आज के उन भटके हुए नौजवानों की कहानी है जो समाज के ठेकेदारों के बहकावे में आकर हथियार उठा लेते हैं और ‘जे़हाद’ की राह पर चल पड़ते हैं। वह इस बात से अन्जान हैं कि जो
एक बार इन समाज के ठेकेदारों के बहकावे में आकर अपना रास्ता भूल जाते हैं और उनके कहने से हथियार उठा लेते हैं तो उनकी आखिरी मंज़िल सिर्फ उनकी मौत ही होती है।
‘ज़ेहाद’ भी कुछ ऐसे ही भटके हुए एक ऐसे नौजवान की कहानी है जिसके सामने अपनी मां और बहन पर अत्याचार होता है और यहां तक की बलात्कार भी होता है। यह नौजवान गुस्से में आकर उन लोगों के खिलाफ हथियार उठा लेता है और ‘जे़हाद’ के नाम पर अपनी जान न्योछावर करने निकल पड़ता है। मगर ऐसे नौजवान इन बातों से बेखबर हैं कि नेता लोग और समाज के ठेकेदार इनको मोहरा बनाकर अपनी जेब में करोड़ों रुपये की सम्पत्ति ठूंस लेते हैं और इन जैसे युवकों के नसीब में सिर्फ मौत ही लिखी होती है। ‘ज़ेहाद’ फिल्म की पूरी शूटिंग कश्मीर और इसके आस पास के इलाकों में पूरी की गई है जैसे कि पहलगाम, चरारेशरीफ, पुलवामा और श्रीनगर के आसपास के इलाकों इस फिल्म की शूटिंग पूरी की गई है।
इस फिल्म के निर्माता और नायक हैदर काज़मी और फिल्म के लेखक-निर्देशक राकेश परमार ने कई बार कश्मीर का दौरा करके इस विषय पर रिसर्च किया, वहां के लोगों से मिले और शूटिंग के लिए अपनी मन पसंद के कई लोकेशन पसंद किये। यह फिल्म खास करके फिल्म फेस्टिवल के लिए बनाई गई है ताकि लोगों को फिर से कश्मीर के माहौल का पता चले। इस फिल्म में हैदर काज़मी के अलावा नवोदित नायिका अल्फिया शेख को भी चांस दिया गया है जो शक्लो सूरत से हू-ब-हू कश्मीरी लगती है। फिल्म के लेखक-निर्देशक हैं राकेश परमार। फिल्म के प्रस्तुतकर्ता हैं वी.आर. माथुर और ग्रेडिएट इन्फोटेन्मेंट तथा फिल्म के प्रचारक हैं राजू कारिया।
































