#KaabilReview : फिल्म से बांधे रखेगी ऋतिक रोशन की एक्टिंग

जानिए ऋतिक रोशन की फिल्म काबिल को लोग कितना पसंद कर रहे हैं। इसी के साथ पढ़ें फिल्म को लेकर क्रिटिक्स की क्या राय है।

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कास्ट : ऋतिक रोशन, यामी गौतम, रोनित रॉय, रोहित रॉय डायरेक्टर : संजय गुप्ता प्रोड्यूसर : राकेश रोशन लेखक : संजय मासूम, विजय कुमार मिश्रा क्या है हिट : ऋतिक रोशन
क्या है फ्लॉप : धीमा फर्स्ट हाफ, कहीं कहीं खराब वीएफएक्स।
कब लें ब्रेक : इंटरवल में।
यादगार पल : ऋतिक-यामी का टैंगो डांस जो फिल्म के क्लाइमेक्स में आपको अच्छा खासा सरप्राइज़ दिया।
फिल्म का प्लॉट
फिल्म का प्लॉट : फिल्म का प्लॉट इस फिल्म की शुरुआत होती है रोहन भटनागर (ऋतिक रोशन) से जो नेत्रहीन है और किचन में होता है और इसी के साथ साथ फोन पर बात कर रहा होता है। इसके बाद का सीन कैफेटेरिया का जहां वो मिलता है सुप्रिया (यामी गौतम) से, जिसकी दुनिया भी अंधकारमय होती है। इसके बाद होती है कॉफी डेट,टैंगो डांस जिसे देखकर आपको काफी मज़ा आने वाला है। साथ में हमारी लेडी दे देती हैं उन्हें दिल। फिर उसके बाद दोनों कर लेते हैं शादी..क्योंकि अगर अंधेरे में किसी का साथ हो ना..तो अंधेरा कम लगता है और दोनों की जिंदगी में खुशियां ही खुशियां होती हैं। लेकिन ये खुशी ज्यादा देर की नहीं होती क्योंकि उनके पड़ोसी अमित शेल्लार (रोहित रॉय) और उनके दोस्त वसीम की सुप्रिया पर बुरी नज़र होती है और वो उसका रेप करते हैं। फिल्म का प्लॉट फिल्म का प्लॉट बस यहीं से होती है
कहानी की असली शुरुआत..ऋतिक यानी रोहन उनसे बदला लेने के लिए क्या क्या हथकंडे अपनाता है उसके लिए आपको फिल्म देखने ज़रूर जाना चाहिए। निर्देशन निर्देशन फिल्म के निर्देशक संजय गुप्ता की पिछली फिल्म जज़्बा डिज़ाज्स्टर थी लेकिन काबिल जैसी फिल्म लाने के लिए उन्हें एक बार थैंक्यू तो बोलना बनता है। इस फिल्म में ऐसे सभी एलिमेंट हैं जो थियेटर में सीटीमार एंटरटेनमेंट देने के लिए काफी है।
पर्फॉर्मेंस
पर्फॉर्मेंस: पर्फॉर्मेंस अब पर्फॉमेंस की बात आई है तो ऋतिक रोशन को ही सबसे पहले याद किया जाएगा। फिल्म में ऋतिक की पर्फॉमेंस वाकई में ‘स्टार’ वाली है। फिल्म में अपनी पूरी जान लगा दी है जो काबिल-ए-तारीफ है। फिल्म में इन्होंने नेत्रहीन का किरदार निभाया है जिसके साथ पूरी तरह न्याय किया है।
तकनीकी पक्ष
पर्फॉर्मेंस वहीं बात की जाए यामी गौतम की तो उनकी एक्टिंग भी दमदार है। दोनों ने ही अपने अपने रोल में जान डाल दी है। वहीं रोहित रॉय और रोनित रॉय फिल्म में विलेन के किरदार में हैं लेकिन दोनों को कैरेक्टर के साथ ज्यादा एक्सपेरिमेंट नहीं किया गया। वहीं नरेंद्र झा और गिरिश कुल्कर्णी अपने रोल में अच्छे लगे हैं।
तकनीकी पक्ष: तकनीकी पक्ष अब आते हैं फिल्म के तकनीकी पक्ष पर। अगर इस ओर ध्यान दिया जाए तो ऐसा लगता है कि ये फिल्म पश्चिम से प्रेरित है। बदला लेने के कॉन्सेप्ट से फिल्म के मेकर पूरी तरह रू-ब-रू हैं। लेकिन इस फिल्म में जो ज्यादा में विलेन को मारने का तरीका काफी दिलचस्प है।
तकनीकी पक्ष वहीं फिल्म के लाउड डायलॉग कुछ खास नहीं हैं लेकिन सिंगल स्क्रीन थियेटर में ये पसंद किए जा सकते हैं। फिल्म में कहीं कहीं वास्तविकता कम नज़र आएगी लेकिन फिर भी ये लोगों को बांधे रखेगी। लेकिन फिल्म की एडिटिंग पर थोड़ा काम और किया जा सकता था।

म्युज़िक: म्युज़िक फिल्म का टाइटल ट्रैक ‘काबिल-ए-तारीफ’, उर्वशी रौतेला का सारा ज़माना लोगों को पसंद आया है। वहीं मोन-अमूर भी लोगों को भा गया। वर्डिक्ट वर्डिक्ट हालांकि इस फिल्म में कुछ नया नहीं है लेकिन ऋतिक रोशन की शानदार एक्टिंग आपको फिल्म के अंत तक बांधे रखेगी।

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