कहते हैं ‘फस्र्ट इंप्रेशन इज द लास्ट इंप्रेशन’ और बॉलीवुड के दिग्गज फिल्मकार महेश भट्ट ने अपनी पहली पंजाबी फिल्म ‘दुश्मन’ को हल्के में लेकर पॉलीवुड के दर्शकों को निराश किया है। फिल्म दोस्ती का पैगाम देती है। फिल्म के निर्देशन की जिम्मेदारी उन्होंने शगुफ्ता रफीक को सौंपी थी, जो वास्तव में एक लेखिका हैैं।
शगुफ्ता ने भट्ट कैंप की अनेक हिट फिल्मों की पटकथा लिखी है, जिनमें से ‘आशिकी 2’, ‘मर्डर 2’, ‘जन्नत 2’, ‘राज – द मिस्ट्री कंटीन्यूज़’, ‘राज 3’ आदि शामिल हैं, लेकिन ‘दुश्मन’ देखकर लगा – जिसका काम उसी को साजे और करे तो डंका बाजे। उन्होंने कहानी भले ही अच्छी बुनी है, लेकिन स्वयं को अच्छी निर्देशक सिद्ध नहीं कर पायीं। निर्देशन में कई तरह की खामियां हैं, जिन्हें भट्ट साहब ने भी नजरअंदाज कर दिया है।
सीन्स को बेवजह खींचा गया है, जिससे फिल्म की गति स्लो और र्बोंरग हो जाती है। जश्न सिंह तो फिल्मों में नए हैं, उस हिसाब से उनकी एक्टिंग ‘सहनीय’ है लेकिन करतार चीमा से बेहतर अभिनय की उम्मीद थी। फिल्म की ग्लैमर डॉल साक्षी गुलाटी का रोल मात्र एक आइटम सांग व कुछ सीन्स के बाद उसे विदेश से जबरन स्वदेश लौटा कर समेट दिया गया। फिल्म की कहानी बैंगकाक में एक होटल में काम करने पहुंचे करीम उसमानी (करतार चीमा) तथा नरेन सिंह मान (जश्न सिंह) के इर्द-गिर्द घूमती है।
करीम पाकिस्तान से तथा नरेन भारत से विदेश में पैसा कमाने पहुंचे हैैं। नरेन को पाकिस्तान से नफरत है क्योंकि एक आतंकी हमले में वह अपने पिता व भाई को खो चुका है। हालांकि करीम नरेन से प्रेम से बोलता है लेकिन नरेन उसे हमेशा नफरत से देखता है और बात करने से भी कतराता है। जिस होटल में करीम और नरेन काम करते हैं, उसी में रिया (साक्षी गुलाटी) बार डांसर है।
वह और नरेन एक दूसरे को पसंद करने लगते हैैं। होटल का मालिक आगा जलाल (गुलशन ग्रोवर) गैर कानूनी काम करता है और दोनों युवकों को ब्लैकमेल करते हुए, उनसे गलत काम करवाने लगता है। कैसे तीनों इस माहौल से निकलते हैं? कैसे सरहदों की दुश्मनी की दीवार से ऊपर उठती है दोस्ती? इसी को दर्शाती है फिल्म ‘दुश्मन’। कुल मिला कर भारत-पाक के रिश्तों की बात करने वाली यह फिल्म दर्शकों को प्रभावित करने में कामयाब नहीं रही।



































