जयपुर। सरकारें आई और चली गई लेकिन राजस्थानी सिनेकारों की समस्याए आज भी जस की तस खडी है। राजस्थानी फिल्मकारों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने राजस्थानी फिल्मों के प्रोत्साहन और संवर्धन के लिए अनुदान राशि 5 लाख से बढाकर 10 लाख कर दी थी लेकिन आज तक एक भी फिल्म को पूरी अनुदान राशि नही मिल पाई है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार राजस्थानी भाषा की करीब 10 से अधिकत फिल्में बन रही है लेकिन हर साल औसतन 3 या 4 फिल्मों को ही अनुदान राशि मिल रही है। सरकार ने अनुदान राशि तो बढा दी लेकिन अनुदान के लिए प्रोसेस इतना जटिल कर दिया है जिसके चलते बहुत सी फिल्में तो अनुदान के इंतजार में अभी तक रीलीज भी नही हो पाई है। जानकारी के अनुसार अनुदान के लिए दो श्रेणी बनाई गई है। यू सर्टिफिकेट मूवी को 10 लाख तथा यूए श्रेणी की फिल्मों को 5 लाख रूपए तक का अनुदान देना सरकार ने तया किया हुआ है।
सूत्रों के हवाले से आ रही खबरों को अगर मानें तो इस साल राज्य सरकार ने दस में से सिर्फ तीन फिल्मों को अनुदान राशि स्वीकृत की है जबकि सात फिल्मों को प्रीव्यू कमैटी की अस्पष्ट अनुशंषा के चलते अनुदान राशि रोक दी गई है। सिर्फ उन्ही फिल्मों को अनुदान के लिए चुना गया है जिनके लिए प्रीव्यू कमैटी ने स्पष्ट रूप से अभिशंषा की है।
प्रीव्यू कमैटी का कहना है अनुदान से पहले ही फिल्म मेकर्स ने फिल्म को रीलीज कर दिया है इसके चलते ये फिल्में अनुदान की हकदार नही है जबकि फिल्म मेकर्स का कहना है कि प्रीव्यू के बाद ही विभाग की पहल पर फिल्म को रीलीज किया गया है।



































