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‘लिपस्टिक अंडर माय बुर्का’ को ‘ए’ सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश

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लिपस्टिक अंडर माय बुर्का

मुम्बई। द फिल्म सर्टिफिकेशन अपेलेट ट्रिब्यूनल ने कॉन्ट्रोवर्शल हिन्दी फिल्म ‘लिपस्टिक अंडर माय बुर्का’ के कुछ सेक्स सीन को कट करने साथ इसे ‘ए’ सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड को दिया है। FCAT ने पाया कि सेंसर बोर्ड का इस फिल्म को महिला-प्रधान फिल्म बताकर सर्टिफिकेट देने से इनकार करना एक गलत फैसला था। इसके साथ ही इस विवाद को भी खारिज कर दिया गया कि इस फिल्म में महिलाओं को गलत तरह से दिखाया गया है और एक खास समुदाय की महिलाओं पर निशाना साधा गया है।

अपने आदेश में FCAT ने कहा है, ‘किसी फिल्म पर किसी तरह का प्रतिबंध नहीं हो सकता, फिर चाहे वह महिला प्रधान हो या उसमें सेक्शुअल फैंटसीज़ है या फिर महिलाओं की आंतरिक इच्छा के जतावे वाले एक्प्रेशन हों।’ यह फिल्म उन चार महिलाओं की कहानी है, जो बंदिशों और दवाब की बेड़ियों को तोड़कर एक आजाद ज़िंदगी जीने की ख्वाहिश रखती हैं।

सेंसर बोर्ड (CBFC) अध्यक्ष पहलाज निहलानी ने फिल्म को फरवरी में सर्टिफिकेट देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि यह फिल्म ‘महिला प्रधान’ है और इसमें ऑडियो पॉर्नोग्रफ़ी (गंदी भाषा का इस्तेमाल) है।

प्रड्यूसर प्रकाश को लिखे एक पत्र में बोर्ड ने कहा था, ‘इस फिल्म की कहानी महिला प्रधान है और उनकी फैंटसी काफी अधिक है, इसमें लगातार कई सेक्शुअल सीन हैं, अश्लील भाषाओं का इस्तेमाल और ऑडियो पॉर्नोग्रफी है। यह फिल्म समाज के एक खास वर्ग की भावनाओं का आहत करती है, इसलिए फिल्म को अस्वीकार किया जा रहा है।’

फिल्म में कोंकणा सेन शर्मा, रत्ना पाठक लीड रोल में हैं। यह फिल्म पिछले साल सबसे पहले मामी फिल्म फेस्टिवल में दिखाई गई, जिसे ‘स्पिरिट ऑफ एशिया अवॉर्ड’ और ‘ऑक्सफेम अवॉर्ड’ से नवाजा गया। बोर्ड से नकारे जाने के बाद फिल्म निर्देशक अलंकृता श्रीवास्तव और निर्माता प्रकाश झा ने एफसीएटी में अपील दाखिल की थी।

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