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Home म्यूजिक श्रद्धान्जली : गुम हुई शास्त्रीय संगीत की सबसे मधुर आवाज

श्रद्धान्जली : गुम हुई शास्त्रीय संगीत की सबसे मधुर आवाज

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प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने हिन्दुस्तानी शास्त्रीय गायक किशोरी आमोनकर के निधन पर संवेदना व्यक्त की

मुम्बई। महान प्रतिभाओं से भरे पूरे अतरौली-जयपुर घराने की बेमिसाल लयकारी को कामना,वियोग और एकाकीपन के दुख से जोड़कर ‘रस’ को एक नई पहचान देने वाली जानीमानी शास्त्रीय संगीत गायिका ‘किशोरी अमोनकर’ का सोमवार की रात्रि को निधन हो गया। वे 84 वर्ष की थी और काफी समय से बीमार चल रही थी। सरकार की ओर से उन्हें 1987 में पद्म भूषण और साल 2002 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया था।
ख्याल, ठुमरी और भजनों को शास्त्रीय संगीत से सराबोर करने वाली किशोरी अमोनकर ने अपनी माता मोघूबाई कुर्दिकर से संगीत की शिक्षा हासिल की जो स्वयं एक नामी गायिका थीं।

किशोरी अमोनकर फिल्मों में भी अपनी आवाज दे चुकी हैं। उन्होंने 1964 में आई फिल्म ‘गीत गाया पत्थरों ने’ का टाइटल सॉन्ग गाया था। इसके साथ ही उन्होंने 1990 में ‘दृष्टि’ में भी अपनी आवाज दी थी। भारत सरकार ने किशोरी अमोनकर को वर्ष 1987 में पद्म भूषण और साल 2002 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया था।

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने हिन्दुस्तानी शास्त्रीय गायक किशोरी आमोनकर के निधन पर संवेदना व्यक्त की, उन्होंने कहा कि अमोनकर का निधन भारतीय शास्त्रीय संगीत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उसके निधन से गहरा दुःख हुआ हैं, उसकी आत्मा को शांति मिले।

शबाना आज़मी ने ट्विट पर लिखा, “ये बहुत बड़ा नुकसान है. मैं उनकी बहुत बड़ी फ़ैन हूं और ऐसे समय में रहने के लिए ख़ुद को भाग्यशाली समझती हूं जिसमें मैं किशोरी अमोनकर जी को गाते हुए सुन पाई.”

शंकर माधवन ने लिखा, “महानतम किशोरी अमोनकर जी नहीं रही. ये भारतीय शास्त्रीय संगीत के लिए बहुत बड़ी क्षति है. उनका संगीत हमेशा जीवित रहेगा.”

सुप्रिया सुले ने किशोरी अमोनकर के साथ अपनी एक फोटो ट्वीट की है और लिखा है ‘मेरी सबसे प्रिय क्लासिकल सिंगर अब इस दुनिया में नहीं रहीं. मैं बहुत बहुत दुखी हूं.’

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