जयपुरराईट्स भी कह उठे बाप—रे—बाप

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कलानेरी आर्ट गैलरी में लगातार दो दिन बाप—रे—बाप नाटक का मंचन

जयपुर। कलानेरी आर्ट गैलरी के थियेटर में कलानेरी अकादमी आॅफ फाइन आर्ट की ओर से 19 व 20 मई को लगातार दो दिन बहुचर्चित नाटक ‘बाप—रे—बाप’ का मंचन किया गया। जयपुरराइट्स ने भी हास्य और व्यंग से भरपूर इस नाटक का जमकर लुत्फ उठाया। पद्मश्री सम्मान से सम्मानित लेखक स्वर्गीय के पी सक्सेना द्वारा लिखित इस नाटक का मंचन पूना फिल्म संस्थान से स्नातक और जयपुर के जानेमाने थियेटर डायरेक्टर दिनेश प्रधान के निर्देशन में किया गया।
आमतौर पर बच्चे घर छोडकर भागते तो सुना होगा आपने लेकिन इस नाटक में तो एक बाप ही बच्चों के रूखे व्यवहार से व्यथित होकर घर छोडकर भाग जाता है। उसके बाद शुरू होता हे असली धमाल वो बेटे का दुख, बहु की लापरवाही, समाज के तंज और ना जाने क्या—क्या। एकदम कसी हुई कहानी में दर्शकों के ठहाके बंद होने का नाम नही ले रहे थे। प्रस्तुत नाटक में बाप के भाग जाने या खो जाने के बहाने से उन ” ऊंचे लोगों ” पर भी हास्य-व्यंग्य के दो-दो छींटे डाले गए हैं , जहां घर के आधुनिक माहौल में पुरानी परंपरागत मान्यताओं वाले बाप का दर्ज़ा घर के किसी पुराने बर्तन से ज़्यादा नहीं है।

रंगशीर्ष आर्ट एंड कल्चर रिसर्च सोसायटी की इस प्रस्तुति में धीरज भटनागर, मान्य रावत , दीपक शर्मा , विनोद जोशी, अविनाश सोनी, मुकेश सिंह, नीरज सैदावत, मानसी शर्मा , संजय मीणा और लव सोनी ने अपने अभिनय का लोहा मनवाया । नाटक में संगीत चंचल शर्मा ने दिया जबकि प्रस्तुति नियंत्रक अनिता प्रधान थी।

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