डॉ कृष्णा जाखड़ को अकादेमी का प्रतिष्ठित अनुवाद पुरस्कार

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राजस्थानी का अनुवाद अवार्ड प्राप्त करने वाली डॉ. कृष्णा पहली महिला रचनाकार, – ’गाथा तिस्ता पार री’ अनुवाद कृति के लिए मिला पुरस्कार

चूरू। साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली की ओर से असम के गुवाहाटी में शुक्रवार को हुए समारोह में चूरू की अनुवादक-लेखिका डॉ कृष्णा जाखड़ को राजस्थानी भाषा के लिए साहित्य अकादेमी अनुवाद पुरस्कार 2017 प्रदान किया गया। गुवाहाटी के डिस्ट्रिक्ट लायब्रेयरी सभागार में शुक्रवार शाम आयोजित समारोह में अकादेमी के अध्यक्ष डॉ. चंद्रशेखर कंबार ने जाखड़ सहित 24 भारतीय भाषाओं के अनुवादक रचनाकारों को वर्ष-2017 के श्रेष्ठ अनुवादक पुरस्कार स्वरूप 50-50,000 रुपये की राशि, ताम्रफलक और शॉल अर्पित कर पुरस्कृत किया।
डॉ. कंबार ने इस मौके पर कहा कि अनुवाद से ही सृजन को विस्तार मिलता है। साहित्य को ग्लोबल बनाने के लिए अनुवाद एक विश्वसनीय माध्यम है। अकादेमी के माध्यम से विश्व साहित्य को विभिन्न भाषाओं में अनुवाद कराने का भी महत्ती कार्य किया जा रहा है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रतिष्ठित साहित्यकार डॉ. लीलाधर जगूड़ी ने इस अवसर पर कहा कि हमने अनुवाद को प्राथमिकता में नहीं रखा, न अनुवादकों को गंभीरता से लिया है। अनुवाद के क्षेत्र में प्रयोगशालाओं जैसा कार्य नहीं हुआ, जिससे बच्चे कुछ सीख सकें। अनुवादक दोनों भषाओं का विशेषज्ञ होता है। ऐसे अनुवादकों की जितनी सराहना की जाए, कम है। अनुवाद सैकेंड-हैंड या कमज़ोर शब्द नहीं होता है। वाद, विवाद, प्रतिवाद और अनुवाद होना ही चाहिए। तुलसीदास एक रचनाकार के साथ-साथ मौलिक अनुवादक हैं। उन्होंने कहा कि भाषा में रचनात्मकता होनी चाहिए। रचनात्मकता भाषा को उत्कृष्ट बना देती है। रचनात्मक भाषा से ही लेखन बचाया जा सकता है।
अकादेमी के उपाध्यक्ष माधव कौशिक ने इस अवसर पर कहा कि इस मुल्क को एक सूत्र में बांधने वाले अनुवादक ही हैं। हमारे पास कुछ भी नहीं होता अगर अनुवादक नहीं होते। अनुवादक ऋषि-परम्परा में शामिल रचनाकार हैं। संचालन अकादेमी सचिव के श्रीनिवासराव ने किया। दीक्षा प्रियदर्शिनी ने प्रारम्भ में मीरां का पद प्रस्तुत किया। विराजदास ने संगत की। इस मौके पर अकादेमी उप सचिव रेणुमोहन भान, अकादेमी के राजस्थानी भाषा परामर्श मंडल के संयोजक मधु आचार्य ’आशावादी’, मशहूर शायर शीन काफ निजाम, साहित्यकार दुलाराम सहारण, राजस्थानी के वरिष्ठ कथाकार-कवि कमल रंगा व हरीश बी.शर्मा सहित साथ-साथ अकादेमी जनरल कौंसिल के सदस्य, राजस्थानी व हिंदी सहित साहित्य अकादेमी की मान्यता प्राप्त 24 भारतीय भाषाओं के रचनाकार, लेखक मौजूद रहे।
उल्लेखनीय है कि चूरू जिले के खारिया बास (राजगढ़) में 1 मार्च 1982 को पिता होशियार सिंह एवं माता भतेरी देवी के घर जन्मीं डॉ कृष्णा जाखड़ राजस्थानी की प्रतिष्ठित आलोचना शोध पत्रिका की संपादक हैं। राजगढ़ के तोला गर्ल्स कॉलेज में सहायक प्रोफेसर डॉ जाखड़ का अनुवाद क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य है। ‘गाथा तिस्ता पार री’ के अलावा ‘नापीजतौ आभौ’ एवं ‘अेक कीड़ी रो महाभारत’ उनकी अनूदित पुस्तकें हैं। इसके अलावा शोध प्रबंध ‘प्रभा खेतान के साहित्य में नारी विमर्श’, ‘हक के लिए’ उनकी चर्चित किताबें हैं। डॉ. जाखड़ को उनके अनुवाद ’गाथा तिस्ता पार री’ के लिए यह सम्मान अर्पित किया गया है जो कि देवेश राय के बांग्ला उपन्यास ’तिस्ता पारेर वृत्तान्त’ का राजस्थानी अनुवाद है।

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