5 मिनट की फिल्म 500 साल तक मत भूलना

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कोरोना 2020 की कहानी,सन् 2025 की कल्पना,  संदीप भूतोडिया की फिल्म वन्स अपॉन ए टाइम… मेरी प्यारी आव्या कभी ना भूलने वाला सबक

जयपुर। (अनुराग रायज़ादा) इन दिनों पूरी दुनिया जिस संकट से गुजर रही है उसे हम कोरोना वायरस के नाम से जानते हैं।इस वायरस ने पूरी दुनिया को चपेट में लिया।साल 2020 का भयानक सच है कोरोना, जिसे भूलने में शायद मानव सभ्यता को बरसों लग जाएं।कोरोना वायरस को अमीर-ग़रीब, गोरे-काले, पूर्वी और पश्चिमी सभ्यताएं सभी अपने तरीके से याद रखेंगे।जाहिर सी बात है भारत भूमि का रेतीला, कहीं पथरीला तो कहीं हरा भरा यानी रंग रंगीला राजस्थान इस कोरोना वायरस से अछूता नहीं।राजस्थान की आबो-हवा इंसान को नकारात्मक से सकारात्मक सोच अपनाए रखने और अपने जीवट के कारण जिंदा ही नहीं वरन जीने की ललक इंसान में पैदा करती है ।इसी जज्बे को और इस कोरोना वायरस के दौरान अपनी पुरानी आदतों या सभ्यता को लौटते इंसान को सकारात्मक सोच,सीख और प्यारी झिड़की देती हुई शार्ट फिल्म है ‘वन्स अपॉन ए टाइम… मेरी प्यारी आव्या’ इस शॉर्ट स्टोरी का कांसेप्ट तैयार किया है प्रख्यात समाजसेवी और मरुधरा की सभ्यता, संस्कृति और परंपरा के संवाहक संदीप भूतोडिया ने ।शार्ट फिल्म में संगीत निर्देशन दिया विश्वविख्यात मोहन वीणा वादक पंडित विश्व मोहन भट्ट ने।यूट्यूब पर यह फिल्म देखी जा सकती है। चूरू जंक्शन से अपने सफर को निकलती संदीप भूतोडिया की फिल्म की शुरुआत अपनी बिटिया आव्या को एक कहानी सुनाने से होती है जो आप से 5 साल बाद की दुनिया में सुनाई जा रही है यानी 2025 में। कहने का अर्थ है कि 2020 के बाद कोरोना वायरस तो चला गया लेकिन जो निशां कोरोना वायरस छोड़ गया उसमें पॉजिटिविटी खोजते खोजते इंसानी दुनिया के लिए एक ऐसी कहानी गढ़ी गई जो सदियों तक मानव इतिहास को प्यार, अपनापन, सहयोग संवेदनशीलता, रिश्तों की गर्माहट और प्रकृति का सम्मान करते हुए याद दिलाती रहेगी कि कोरोना काल तक ‘हम सिर्फ जिंदा थे आज हम जिन्दगी जीते हैं’।
संदीप भूतोडिया और उनकी बेटी आव्या की आवाज से सजी यह शॉर्ट फिल्म है तो 5 मिनट की लेकिन इसमें जो बातें कही गई हैं या याद दिलाई जा रही है वह शायद इंसान 500 सालों तक नहीं भूलना चाहेगा।अगर हम करते हैं मानवीय सभ्यता से प्यार और करते रहना चाहते हैं अपने बच्चों को दुलार तो सभी को देखनी चाहिए ‘वन्स अपॉन ए टाइम… मेरी प्यारी आव्या’ एक बार ।यह फिल्म हमें यह सोचने पर विवश करती है कि हम सब अपनी दुनिया में उस मकड़ी या रेशम के कीड़े की तरह अपने प्राण गवां रहे थे जो अपने ताने-बाने को ही अपना सर्वस्व मान लेता है।
कोरोना 2020 तो चला गया। हम सब यही चाहेंगे कि वह कभी लौटकर नहीं आए,लेकिन इस वायरस को धकेलने में जो हमने सीखा वह सबक हम कभी नहीं भूले क्योंकि हम हमारी गलतियों के लिए बार-बार वन्स अपॉन ए टाइम मेरी… प्यारी आव्या नहीं रच सकते।

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