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थियेटर को आमजन से जोड़ना और प्रोफेशनल थियेटर पर ध्यान की आवश्यक्ता : रणवीरसिंह

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1983
संस्कृति दिवस

इप्टा के 75 वर्ष होने पर जन संस्कृति दिवस का आयोजन, विचार गोष्ठी का किया आयोजन

जयपुर। बदले समय के साथ थियेटर को आमजन से जोडना और प्रोफेशनल थियेटर पर ध्यान देने की सख्त आवश्यक्ता है। ये विचार इप्टा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रणवीर सिंह डूंडलोद ने इप्टा की 75वीं वर्षगांठ और जनसंस्कृति दिवस के अवर पर कुमारानन्द भवन में आयोजित विचार गोष्ठी में कहे। ‘कला संस्थाओं की स्वायत्तता का सवाल’ विषयक गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए रणवीर सिंह ने थियेटर की आज की दशा पर चिंता जताते हुए सिंह ने कहा कि हमें थियेटर को आमजन से जोडना होगा, हमारा थियेटर जनता से जुडा हुआ नही है जिसके चलते रंगकर्मियों द्वारा अपने हक की मांग को लेकर किए गए आंदोलनों में आमजन का जुडाव नही हो पाता है।
उन्होने कहा कि दुनियां में भारत को छोडकर कहीं भी शौकिया यानी एमेच्योर थियेटर नही है। जर्मनी, अर्जेंटीना, लेटविया आदि देशों के रंगकर्म से जुडी महत्वपूर्ण जानकारी सांझा करते हुए रणवीर सिंह ने अनुदान की परम्परा को सबसे अधिक घातक बताया। इस प्रकार की परम्पराओं से मुक्ति के लिए उन्होने युवाओं से आगे आने की अपील करते हुए कहा कि प्रोफेशनल थियेटर की ओर जाने के लिए प्रयास किए जाने चाहिए।
वरिष्ठ कवि और दूरदर्शन केन्द्र के पूर्व उप महानिदेशक कृष्ण ​कल्पित ने संस्थाओं के अस्तित्व को बचाने के लिए प्रयास किए जाने की बात पर बल देते हुए कहा कि निर्माण के साथ ही कला संस्थाओं के निर्माण के साथ ही इनके पतन की शुरूआत भी हो चुकी थी, कलाधर्मी आज तक इससे उबरने के लिए जूझ रहे है। प्रोगेसिव आर्टिस्ट ग्रुप के अध्यक्ष आर बी गौतम ने स्वयात्तशाशी अकादमियों में हावी हो रही नौकरशाही और राजनीति से मुक्ति के प्रयास तेज करने की बता कही। कला समीक्षक और वरिष्ठ लेखक राधेश्याम तिवारी ने कहा कि स्वाधीनता और स्वायत्तता मांगी नही जाती बल्कि संघर्ष करके लेनी ही पडती है। सुप्रसिद्ध आलोचक राजाराम भादू ने कहा कि किसी भी स्वतंत्र राष्ट्र में कलाकारों और कलमकारों के लिए स्वायत्तता एक अनिवार्य शर्त होती है, कोई भी सरकार इस अधिकार से उसे महरूम नहीं कर सकती। जहाँ स्वायत्तता नहीं होगी वहां सृजन संभव नहीं है। गोष्ठी में लोकेश कुमार सिंह साहिल,हरीश कुमार करमचंदानी, फारूक आफरीदी, कैलाश मनहर, अजय अनुरागी, सबीर हुसैन, इश्वर दत्त माथुर, राजेंद्र शर्मा राजू सहित बड़ी संख्या में प्रमुख साहित्यकार, कलाकार, चित्रकार, रंगकर्मी और संस्कृतिकर्मी मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन इप्टा के उप महासचिव मुकेश चतुर्वेदी ने किया। सचिव संज विद्रोही ने सभी का आभार प्रकट किया।

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