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कला एवं संस्कृति मंत्री ने ‘‘पिछवाई’’ कला कार्यशाला का अवलोकन किया ‘गणपति यात्रा’’ से हुए अभिभूत

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जयपुर। राज्य के कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. बी.डी.कल्ला ने बुधवार को उदयपुर जिले स्थित पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र के मुख्यालय बागोर की हवेली में केन्द्र द्वारा आयोजित ‘‘पिछवाई कला कार्यशाला’’ का अवलोकन किया तथा कार्यशाला में भाग लेने वाले कलाकारों से उनके द्वारा सृजित चित्रों की जानकारी ली। डॉ. कल्ला बुधवार दोपहर बागोर की हवेली पहुंचे जहां केन्द्र के प्रभारी निदेशक सुधांशु ​िसंह द्वारा उनका स्वागत किया। कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ कल्ला द्वारा इस अवसर पर केन्द्र के मुख्य द्वार पर स्थापित एवं केन्द्र द्वारा विगत दिनों दो चरणों में आयोजित फाइबर स्कल्पचर वर्कशॉप में देश के युवा कलाकारों द्वारा बनाई 12 फीट लम्बी ‘‘तोप’’ का अवलोकन किया।
ऎतिहासिक बागोर की हवेली के वास्तु से मेल खाती इन तोपों के द्वार पर लगने से द्वार की आभा में जहां एक नयेपन का आभास होता है वहीं इसके लगने से हवेली प्रांगण के सौन्दर्य में भी अभिवृद्धि हुई है। इसके पश्चात डॉ. कल्ला ने बागोर की हवेली में आयोजित ‘‘पिछवाई चित्रकला कार्यशाला’’ में पिछवाई चित्र सृजन कर रहे चित्रकारों से भेंट की। कोविड-19 के संक्रमण को दृष्टिगत रख्ते हुए सामाजिक दूरी का प्रयोग तथा स्वास्थ्य मापदण्डों के प्रयोग के साथ आयोजित इस कार्यशाला में 10 चित्रकार भाग ले रहे हैं। कार्यशाला में सृजित चित्रों को हवेली में प्रदर्शित किये जाने की योजना है।

‘‘गणपति यात्रा’’ और लोक व जनजाति प्रतिमाओं से अभिभूत हुए कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. कल्ला

कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. बी.डी कल्ला ने बुधवार शाम पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र के ग्रमीण शिल्प एवं लोक कला परिसर में केन्द्र द्वारा स्थापित फाइबर मूर्ति शिल्पों का अवलोकन किया जिसमें मुख्य रंगमंच के समीप स्थापित ‘‘गणेशोत्सव’’ में गणपति प्रतिमा की शोभा यात्रा के दृश्य बिम्ब की मुक्तकंठ से प्रशंसा की।केन्द्र के प्रभारी निदेशक श्री सुधांशु सिंह ने बताया कि शिल्पग्राम में विगत दिनों केन्द्र द्वारा आयोजित फाइबर स्कल्पचर वकशॉप में मुंबई के सर जे.जे. स्कूल ऑफ आट्र्स के मूर्ति शिल्पकारों द्वारा फाइबर माध्यम का प्रयोग करते हुए विभिन्न मूर्ति शिल्पों का सृजन किया गया। केन्द्र द्वारा वर्ष 1989 में स्थापित शिल्पग्राम लोक कला और लोक तत्वों से युक्त परिसर है। इसके इन्ही तत्वों को दृष्टिगत रखते हुए कार्यशाला को थीम बेस बनाया गया तथा केन्द्र के सदस्य राज्योंं के जनजीवन से जुड़ी कृतियों का सृजन किया गया। इसमें महाराष्ट्र का ‘‘गणेशोत्सव’’ प्रमुख है। लगभग 8 फीट की विशाल गणपति प्रतिमा के आगे पारंपरिक परिधान में नाचते-गाते और पताका लहराते जन समूह के दृश्य को प्रदर्शित किया गया है।शिल्पग्राम में ही बंजारा रंगमंच के समीप केन्द्र के सदस्य राज्यों के लोगों के जीवन को दर्शाने का प्रयास फाइबर मूर्ति शिल्पों के माध्यम से किया गया है। इनमें राजस्थान व गुजरात का रेबारी, महाराष्ट्र का कोली तथा गोवा के मछली पालक के मूर्ति शिल्प प्रमुख हैं।इस अवसर पर संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार द्वारा आयोजित ‘‘संकल्प पर्व’’ अभियान के अंतर्गत कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला ने शिल्पग्राम में ‘‘बिल्व’’ के पौधे का रोपण भी किया।

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