नई दिल्ली। तेलुगु फिल्मों के मशहूर अभिनेता कसीनथुनी विश्वनाथ को साल 2016 का सिनेजगत का सर्वोच्च पुरस्कार ‘दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड’ से सम्मानित किया जाएगा। पुरस्कार की घोषणा सोमवार हुई। उन्हे यह पुरस्कार आगामी 3 मई को विज्ञान भवन में होने वाले नेशनल फिल्म अवॉर्ड सेरेमनी के दौरान राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा प्रदान किया जाएगा। के. विश्वनाथ सप्तापदी और द्वारासंकराभरणम जैसी राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म में भी काम कर चुके हैं। वह पद्मश्री से भी सम्मानित किए जा चुके हैं। इनकी कुछ प्रमुख फिल्मों में ‘सरगम’, ‘कामचोर’, ‘संजोग’, ‘जाग उठा इंसान’ और ‘ईश्वर’ शामिल हैं।
दादा साहेब फाल्के पुरस्कार सरकार द्वारा भारतीय सिनेमा की तरक्की और विकास में शानदार योगदान देने वाले कलाकारों को दिया जाता है। पुरस्कार में एक स्वर्ण कमल (सोने का कमल), 10 लाख की नकद राशि और एक शॉल दिया जाता है। पुरस्कार की घोषणा सोमवार को सूचना और प्रसारण मंत्री वेंकैया नायडू द्वारा दादा साहब फाल्के पुरस्कार समिति की सिफारिश को मंजूरी के बाद की गई है। विश्वनाथ का जन्म गुडीवाडा (आंध्र प्रदेश) में फरवरी 1930 में हुआ। विश्वनाथ ने पांच राष्ट्रीय पुरस्कार, 20 नंदी अवार्ड (आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा सम्मानित), लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड सहित 10 फिल्म फे यर पुरस्कार प्राप्त किए हैं। इन्हें 1992 में पद्मश्री से भी सम्मानित किया जा चुका है।
आंध्र प्रदेश से आने वाले विश्वनाथ ने अभिनेता और निर्देशक दोनों ही रूप में अपने काम से पहचान बनाई है। इतना ही नहीं, वह क्लासिकल व ट्रेडिनल आर्ट, म्यूजिक व डांस में भी रुचि रखते हैं। 1965 के बाद से निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखने के बाद से उन्होंने करीब 50 फिल्में बनाई। उनकी फिल्में साहस और दुर्बलता, आकांक्षाओं और प्रतिबद्धता, दृढ़ता और विकर्षण, सामाजिक मांगों और व्यक्तिगत संघर्ष के से भरी होती थीं। वह अपनी फिल्मों के जरिए बेहद साधारण कहानी बताते थे। उनकी राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने वाली फिल्मों में स्वाति मुथ्यम शामिल है। उनकी सबसे यादगार फिल्मों में से एक श्रीवेन्नेला है। इसमें एक नेत्रहीन बांसुरीवाले और गूंगे चित्रकार की कहानी बताई गई थी जो आपस में प्रेम करने लगते हैं।
2016 का दादा साहेब फाल्के पुरस्कार तेलुगु अभिनेता के. विश्वनाथ को
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