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व्यंग्य चित्रकारों का शहर : बीकानेर

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एक ही शहर के एक ही मोहल्ले में पचासों कार्टूनिस्ट एक साथ सक्रिय हों, ये बात सुनने में अजीब तो है पर सच है. अकेले बीकानेर शहर के गोस्वामी चौक ने हिन्दी पत्रकारिता को शताधिक व्यंग्यकार दिए हैं जिनके व्यंग्यचित्र अक्सर समाचार पत्रों और पत्रिकाओं के माध्यम से पाठकों का ध्यानाकर्षित करते आ रहे हैं. व्यंग्यचित्र-कला को विस्तार देने में बीकानेर में अकेले दाक्षिणात्य प्रवासी तैलंग समाज के कुछ व्यंग्य चित्रकारों का हिंदी की व्यंग्यचित्र कला के विकास में बहुत अनूठा योगदान रहा है. कार्टून के क्षेत्र में (पद्मश्री) सुधीर तैलंग, पंकज गोस्वामी, संकेत , सुधीर गोस्वामी इन्जी, सुशील गोस्वामी, शंकर रामचन्द्र राव तैलंग, अनूप गोस्वामी आदि कई कलाकार हैं जिन्होंने न केवल इस कला को परवान चढ़ाया अपितु, अपनी कला-साधना से वैयक्तिक ख्याति भी अर्जित की . हिंदी क्रिकेट कमेंटेटर प्रभात गोस्वामी के कार्टून्स भी लगभग एक दशक पूर्व विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं. इन दिनों राहुल गोस्वामी, अवनीश कुमार गोस्वामी, अलंकार गोस्वामी जैसे अनेक युवा व किशोर कलाकार लगभग अविज्ञप्त रह कर बतौर अभिरुचि व्यंग्यचित्र के मैदान में तूलिका चला रहे हैं. एक समय वह भी था जब संभवतः पंकज गोस्वामी के प्रभाव और प्रेरणा से व्यंग्यचित्र कला को ले कर बीकानेर के प्रसिद्ध गोस्वामी चौक में एक तूफानी उत्साह का दौर आ गया था, जब वहां का हर दूसरा तीसरा युवा व्यंग्यचित्र बनाता और छपवाता रहा था . इसी बात से प्रभावित हो कर विनोद दुआ ने बीकानेर के गोस्वामी चौक में बनाए जा रहे सेंकडों कार्टून-कलाकारों पर केन्द्रित एक रोचक वृत्तचित्र का निर्माण किया था- जिसका प्रसारण दूरदर्शन के विभिन्न चैनलों पर हुआ था.

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