सेन्ट्रल पार्क में आयोजित हुआ शुभेन्द्र राव का सितार वादन

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जयपुर। स्पिकमैके, टूरिज्म और जेडीए की म्यूजिक इन दी पार्क सीरीज के तहत शनिवार को पहले पं. शुभेन्द्र रॉव ने अपने सितार की मधुर झनकार से और उसके बाद उनकी संगत कर रहे दिल्ली के उस्ताद अकरम खां ने अपने तबले की लय—ताल से संगीत प्रेमियों की जमकर दाद बटोरी। अकरम की लय बांट का अंदाज जुदा था जिसमें सम पर बनकर आने का अंदाज सुनने योग्य था। अकरम को एक ताल बजाने में भी विशेष महारत हांसिल है। इका उल्लेख सितार वादक शुभेन्द्र रॉव ने भी किया है।
उन्होने कहा कि कल मेरे गुरू स्वं. पं. रविशंकर का 97वां जन्मदिवस था इसलिए मैं अपनी प्रस्तुति उन्हे समर्पित कर रहा हॅू। इसके बाद उन्होने संधिप्रकाश काल के राग पूरिया धनाश्री के स्वर सजाए। उन्होने इसमें एक ताल के अलावा रूपक ताल की बंदिशे भी बजाई। उनके वादन में खरज के स्वरों का अंदाज खास था लयकारी में लय की अलग—अलग इकाइयों को सुरों के आकर्षक ताने—बाने में पिरोने का अंदाज भी घरानेदार था जिसमें मैहर सेनिया घराने की खुशबू सहज ही महसूस की जा सकती थी।

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