लोक कलाकारों की प्रस्ततियों ने मोह दर्शकोें का मन

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नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में राजस्थान राज्य के 69वें स्थापना दिवस के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। मुख्य आयोजन राजस्थान सरकार के पर्यटन, कला एवं संस्कृति विभाग द्वारा आई.एन.ए. स्थित दिल्ली हाट में हुआ। समारोह में राजस्थान के लोक कलाकारों ने मनमोहक सांस्कृतिक संध्या में अपनी प्रभावी प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन-मोह लिया। आई.एन.ए. स्थित दिल्ली हाट के रंगमंच के चाराें ओर सैकड़ो की संख्या में मौजूद दर्शकों ने कलाकारों की हौसला अफजाई की। राजस्थानी लोक कलाकारों ने अपनी प्रभावी प्रस्तुतियों से ऎसी धूम मचाई कि दर्शक लोक संगीत और मनभावन नृत्यों के साथ झूूम उठे। सांस्कृतिक संध्या की शुरूआत अनीशूदीन एवं साथी कलाकारों के ‘‘चरी नृत्य’’ से हुई। जिसे किरण कुमारी और अन्य नृत्यांगनाओं ने ‘घूमर नृत्य‘ की प्रस्तुति से परवान पर चढ़ाया, वहीं अन्र्तराष्ट्रीय नृत्यांगना श्रीमती सुरेश ने ’भवई नृत्य‘ की शानदार प्रस्तुति दी। इसी प्रकार भरतपुर से आये कलाकारों ने गफरूद्दीन मेवाती की अगुवाई में ‘भपंग वादन’ और जयपुर के अशेक मिराल एवं दल ने खडताल वादन की प्रभावी प्रस्तुति दी।

झालावाड से आए जुगल किशोर एवं साथियों ने परम्परागत कानग्वािलया नृत्य प्रस्तुत किया। इसी प्रकार नूरजहां एवं साथी कलाकारों ने कालबेलिया नृत्य की रोमांचित प्रस्तुति से दर्शकों की तालियां बटोरी। दौसा के अशोक शर्मा ने अपनी मिमिक्री से दर्शकों को गुदगुदाया। वहीं गोवर्धन (बृज) क्षेत्रा से आये ललित शर्मा एवं साथी कलाकारों ने फूलों की होली और मयूर नृत्य से सांस्कृतिक कार्यक्रम को उत्कर्ष तक पहुॅचाया। समारोह का संचालन हिमानी जोशी ने किया।

प्रारंभ में पर्यटन विभाग की अतिरिक्त निदेशक गुणजीत कौर और राजस्थान सूचना केन्द्र के अतिरिक्त निदेशक गोपेन्द्र नाथ भट्ट ने मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रदीप अवस्थी, कलाकारों और अतिथियों का स्वागत किया। अंत में पर्यटक अधिकारी आर.के.सेनी ने सभी का आभार व्यक्त किया। प्रवासी राजस्थानियों ने दी बधाई दिल्ली में राजस्थान की प्रमुख समाज सेवी संस्थाओं द्वारा राजस्थान दिवस की 68वीं वर्षगांठ पर प्रदेशवासियों को बधाई दी गई। राजस्थान रत्नाकर के चेयरमेन राजेन्द्र गुप्ता, प्रधान रतन पोद्यार और राजस्थान अकादमी के प्रधान गौरव गुप्ता ने सभी प्रवासियों को बधाई देते हुए देश के विकास में प्रवासी राजस्थानियों के योगदान को सराहा।

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